Mumbai: MahaRERA के रिफंड ऑर्डर लागू नहीं कर रहा कलेक्टरेट ऑफिस, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी
Maharashtra: मुंबई के चेम्बूर प्रोजेक्ट में घर खरीदारों को रिफंड दिलाने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कलेक्टरेट ऑफिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि MahaRERA द्वारा दिए गए रिफंड के आदेशों को कल
Maharashtra: मुंबई के चेम्बूर प्रोजेक्ट में घर खरीदारों को रिफंड दिलाने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कलेक्टरेट ऑफिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि MahaRERA द्वारा दिए गए रिफंड के आदेशों को कलेक्टरेट ऑफिस द्वारा ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है, जबकि कानूनन ऐसा करना अनिवार्य है। जस्टिस AS Gadkari और जस्टिस Kamal Khata की बेंच ने इसे बेहद दुखद स्थिति बताया है।
यह पूरा मामला स्नेहा तेजवानी नाम की एक महिला का है, जिन्होंने चेम्बूर प्रोजेक्ट में देरी के कारण 1.5 करोड़ रुपये और ब्याज के रिफंड की मांग की थी। इस मामले में Niraj Kakad Construction के खिलाफ 2020 में ही MahaRERA ने रिफंड का आदेश दिया था, लेकिन अब तक पैसा नहीं मिला। कोर्ट ने खरीदार के हितों की रक्षा के लिए खार स्थित एक फ्लैट पर कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया है।
हाई कोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को मुंबई उपनगर के कलेक्टर और एक तहसीलदार को नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा गया है कि 8 जुलाई के आदेश का पालन न करने और बिल्डर की संपत्तियों का विवरण न देने के लिए उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना (Contempt of Courts Act) की कार्रवाई क्यों न की जाए।
कोर्ट ने पहले भी फरवरी 2026 में यह बात कही थी कि बिल्डर कानून की कमियों का फायदा उठाकर रिफंड के आदेशों को टाल रहे हैं। इस समस्या को रोकने के लिए राज्य के एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने सुझाव दिया था कि प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के समय लागत का 25% सिक्योरिटी के तौर पर जमा कराया जाना चाहिए।
घर खरीदारों के अधिकारों को मजबूत करने के लिए अब कुछ अहम नियम लागू हैं:
| नियम/प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| RERA सेक्शन 57 | अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेशों को सिविल कोर्ट की डिक्री की तरह लागू किया जा सकता है। |
| MahaRERA SOP (Circular 51/2025) | ब्याज, पेनल्टी और मुआवजे की वसूली के लिए विस्तृत प्रक्रिया तय की गई है। |
| वसूली की समय सीमा | मूल आदेश के 60 दिनों बाद भी भुगतान न होने पर रिकवरी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। |
| कठोर कार्रवाई | बिल्डर की संपत्ति कुर्क करना या जेल भेजना जैसे प्रावधान शामिल हैं। |