Maharashtra: MCOCA केस में 9 साल की देरी वजह नहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर देरी की वजह सही तरीके से बताई गई हो, तो सिर्फ समय बीत जाने के आधार पर आपराधिक कार्यवाही को खत्म नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने 2013 के एक जबरन वसूली (ex
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर देरी की वजह सही तरीके से बताई गई हो, तो सिर्फ समय बीत जाने के आधार पर आपराधिक कार्यवाही को खत्म नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने 2013 के एक जबरन वसूली (extortion) मामले में MCOCA लगाने में हुई 9 साल की देरी को जायज माना और आरोपियों की याचिका को खारिज कर दिया।
यह पूरा मामला पवई में जमीन के मालिकाना हक और डेवलपमेंट राइट्स के विवाद से जुड़ा है। पुलिस ने 2013 में FIR दर्ज की थी, लेकिन MCOCA कानून को 2022 में लागू किया गया। इसके खिलाफ साल 2024 में दो डेवलपर्स, राजन सुजानी (75) और किशोर वटनानी (63) ने याचिका दायर कर इसे हटाने की मांग की थी।
सरकारी वकील आशीष सतपुते ने कोर्ट को बताया कि गवाह पहले डर के कारण चुप थे। उन्होंने तर्क दिया कि गैंगस्टर रवि पुजारी और उसके साथी परशुराम शिंदे के खौफ की वजह से लोग सामने नहीं आए। जस्टिस ए एस गडकरी और जस्टिस आर आर भोंसले की बेंच ने इस दलील को स्वीकार किया और कहा कि एक आम इंसान का ऐसा व्यवहार स्वाभाविक और तर्कसंगत है।
कोर्ट ने साफ किया कि हाई कोर्ट का काम सिर्फ यह देखना है कि मामला पहली नजर में सही है या नहीं, न कि पूरी ट्रायल चलाना। वहीं, कोर्ट ने तीसरे आरोपी मंगेश सावंत के खिलाफ MCOCA हटाने का आदेश दिया क्योंकि उनके और संगठित अपराध के बीच कोई सीधा संबंध नहीं मिला। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिविल विवाद होने के बावजूद अगर आपराधिक तत्व मौजूद हैं, तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।