Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने शहीद Agniveer एम मुरली नायक की मां द्वारा दायर याचिका पर केंद्र सरकार के ढीले रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा कि इस मामले में जवाब देने में बहुत देरी हो च
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने शहीद Agniveer एम मुरली नायक की मां द्वारा दायर याचिका पर केंद्र सरकार के ढीले रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा कि इस मामले में जवाब देने में बहुत देरी हो चुकी है। अब कोर्ट ने सरकार को 6 मई 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने का सख्त आदेश दिया है।
मामला क्या है और याचिका में क्या मांग की गई है?
ज्योतिबाई श्रीराम नायक ने अपने बेटे मुरली नायक की शहादत के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मुरली नायक जून 2023 में Agnipath स्कीम के तहत भर्ती हुए थे और 9 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान शहीद हो गए थे। याचिका में मांग की गई है कि शहीद Agniveers के परिवारों को भी नियमित सैनिकों की तरह पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा लाभ दिए जाएं।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्यों फटकारा?
जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस हितेन वेनेगाँवकर की बेंच ने केंद्र की समय बढ़ाने की मांग को ‘असंवेदनशील’ बताया। कोर्ट ने साफ किया कि अब कोई और तारीख नहीं दी जाएगी। अगर 6 मई तक हलफनामा जमा नहीं हुआ, तो सरकार पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून 2026 को तय की गई है।
नियमित सैनिकों और Agniveers के लाभों में क्या अंतर है?
याचिका के अनुसार, Agnipath स्कीम के तहत शहीद होने वाले परिवारों को करीब 1 करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि तो मिलती है, लेकिन उन्हें नियमित सैनिकों की तरह आजीवन पारिवारिक पेंशन और हेल्थकेयर लाभ नहीं मिलते। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके बेटे ने भी वही वर्दी पहनी और वही जोखिम उठाए, इसलिए उनके बलिदान को समान सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
| विवरण |
जानकारी |
| शहीद सैनिक |
एम मुरली नायक (25 वर्ष) |
| शहादत की तारीख |
9 मई 2025 |
| जवाब की आखिरी तारीख |
6 मई 2026 |
| अगली सुनवाई |
18 जून 2026 |
| मुख्य मांग |
नियमित पेंशन और कल्याणकारी लाभ |