Maharashtra: मुंबई के Worli इलाके में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को लेकर BMC और बिल्डर के बीच जमीन का विवाद गहरा गया है। BMC ने अब Bombay High Court से मांग की है कि उसे प्लांट के लिए पूरी 27,698 वर्ग मीटर जमीन चाहिए।
Maharashtra: मुंबई के Worli इलाके में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को लेकर BMC और बिल्डर के बीच जमीन का विवाद गहरा गया है। BMC ने अब Bombay High Court से मांग की है कि उसे प्लांट के लिए पूरी 27,698 वर्ग मीटर जमीन चाहिए। पहले BMC ने कम जमीन से काम चलाने की बात कही थी, लेकिन अब शहर की बढ़ती आबादी और निर्माण कार्यों के कारण पूरी जमीन की जरूरत बताई जा रही है।
BMC को पूरी जमीन की जरूरत क्यों पड़ी?
BMC का कहना है कि Worli और उसके आस-पास के इलाकों में बहुत तेजी से नए घर और कमर्शियल बिल्डिंग बन रहे हैं। इस वजह से सीवेज यानी गंदे पानी की मात्रा बहुत बढ़ गई है। अधिकारियों के मुताबिक, जब पहले जमीन की जरूरत कम बताई गई थी, तब निर्माण कार्य इतने ज्यादा नहीं थे। अब नए आकलन के बाद जरूरत 27,700 वर्ग मीटर तक पहुंच गई है और भविष्य में यह 29,000 वर्ग मीटर तक भी जा सकती है।
ट्रांजिट कैंप और SRA का क्या मामला है?
यह जमीन विवाद एक स्लम रिहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट से भी जुड़ा है। Worli Urban Development Project LLP नाम के डेवलपर ने यहाँ ट्रांजिट कैंप बनाने शुरू कर दिए थे। Bombay High Court ने इस निर्माण पर रोक लगा दी थी क्योंकि SRA ने BMC की आपत्ति के बावजूद इसकी अनुमति दी थी। कोर्ट ने इसे डेवलपर को फायदा पहुँचाने की साजिश माना और SRA के इंजीनियरों पर कार्रवाई करने को कहा।
अब आगे क्या होगा?
डेवलपर ने कोर्ट को भरोसा दिया है कि वह बनाए गए ट्रांजिट कैंप के ढांचों को 90 दिनों के भीतर हटा देगा। वहीं, महाराष्ट्र सरकार ने फरवरी 2026 में जमीन कम करने के फैसले की आंतरिक समीक्षा की थी। अब राज्य सरकार BMC के प्रस्ताव को देखने के बाद अंतिम फैसला लेगी। कोर्ट ने BMC से एक हलफनामा (Affidavit) मांगा है जिसमें उन्हें अपनी बदलती मांगों की वजह बतानी होगी।