Maharashtra: मुंबई में मानसून के दौरान होने वाले जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। शहर के बड़े नालों के किनारे अब 8 फीट ऊंची लोहे की तार वाली जाली
Maharashtra: मुंबई में मानसून के दौरान होने वाले जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। शहर के बड़े नालों के किनारे अब 8 फीट ऊंची लोहे की तार वाली जाली लगाई जाएगी ताकि लोग इसमें कचरा न फेंक सकें। म्युनिसिपल कमिश्नर Ashwini Bhide ने उन सभी इलाकों में फेंसिंग करने के निर्देश दिए हैं जहां लोग अक्सर नालों में कूड़ा डंप करते हैं। यह कदम विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उठाया गया है जहां नालों के किनारे झुग्गी बस्तियां बसी हुई हैं।
नालों पर जाली लगाने का काम कब तक पूरा होगा और इसका डिजाइन कैसा है?
Additional Municipal Commissioner Abhijit Bangar ने जानकारी दी कि यह फेंसिंग लोहे की जाली (wire mesh) से बनी होगी। इसकी ऊंचाई लगभग आठ फीट रखी जाएगी और ऊपर की तरफ एक फीट का मोड़ दिया जाएगा ताकि कोई इसमें कचरा न डाल पाए। जाली लगाने का यह काम अगले दो महीनों के भीतर यानी मानसून शुरू होने से पहले ही पूरा करने का लक्ष्य है। मुंबई में कुल 274 किलोमीटर लंबे बड़े नाले और 673 किलोमीटर छोटे नाले हैं। शहर के पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक कचरा फेंकने से नाले गंदे दिखते हैं और पानी का बहाव रुकने से बीमारियां फैलने का खतरा भी रहता है।
मानसून से पहले जलजमाव रोकने के लिए BMC की अन्य योजनाएं क्या हैं?
BMC मानसून की तैयारियों को लेकर इस बार काफी सख्त नजर आ रही है। कमिश्नर ने निर्देश दिया है कि 31 मई 2026 तक शहर के सभी नालों और नदियों की 100 प्रतिशत सफाई पूरी हो जानी चाहिए। काम में पारदर्शिता लाने के लिए इस बार तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है।
- सफाई कार्यों की निगरानी के लिए GPS ट्रैकर्स और जियो-फेंसिंग का उपयोग किया जा रहा है।
- ठेकेदारों की गड़बड़ियों को रोकने के लिए AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए सफाई काम पर नजर रखी जाएगी।
- पुराने भूमिगत नालों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें मजबूत करने के लिए आधुनिक geopolymer lining तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।
- मुंबई के 100 साल पुराने नालों की उम्र बढ़ाने के लिए ट्रेंचलेस तकनीक से काम किया जा रहा है जो नवंबर 2027 तक पूरा होगा।
इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारी बारिश के दौरान मुंबई की सड़कों पर पानी न जमा हो और कचरे की वजह से नालियां जाम न हों। Dadar-Dharavi जैसे इलाकों में कमिश्नर ने खुद दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है ताकि वहां जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।