Mumbai में निर्माण साइटों पर लगे AQI मॉनिटर्स की होगी जांच, BMC ने शुरू की थर्ड पार्टी ऑडिट की प्रक्रिया
Maharashtra: मुंबई की हवा को साफ रखने और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए BMC ने एक बड़ा कदम उठाया है। शहर में अलग-अलग निर्माण साइटों पर लगे सेंसर-आधारित Air Quality Index (AQI) मॉनिटर्स की अब थर्ड पार्टी एजेंसी से जांच कराई
Maharashtra: मुंबई की हवा को साफ रखने और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए BMC ने एक बड़ा कदम उठाया है। शहर में अलग-अलग निर्माण साइटों पर लगे सेंसर-आधारित Air Quality Index (AQI) मॉनिटर्स की अब थर्ड पार्टी एजेंसी से जांच कराई जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह पता चल सके कि ये मशीनें सही रीडिंग दे रही हैं या नहीं।
BMC ने इसके लिए टेंडर जारी किए हैं। मुख्य मकसद यह देखना है कि लगभग 3,000 सेंसर तकनीकी नियमों और सटीकता के मानकों पर खरे उतर रहे हैं या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि कई बार इन सेंसरों की रीडिंग में अंतर देखा गया है, जिससे जमीन पर प्रदूषण की सही स्थिति का पता नहीं चल पाता। इसी वजह से अब एक बाहरी एजेंसी इन मशीनों का ऑडिट करेगी।
इस ऑडिट के लिए चुनी गई एजेंसी मोबाइल ऑडिट वैन का इस्तेमाल करेगी। इन वैन में हाई-क्वालिटी के उपकरण होंगे, जो साइट पर लगे सेंसर के डेटा की तुलना करेंगे और उसकी सटीकता की जांच करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया 750 दिनों तक चलेगी।
नियमों के मुताबिक, 500 करोड़ रुपये से कम के प्रोजेक्ट्स में सेंसर-आधारित मॉनिटर और 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स में BAM (Reference-grade) मॉनिटर लगाना जरूरी है। साथ ही, साइट पर 3 फीट x 4 फीट के LED बोर्ड लगाने होंगे, जिन पर PM2.5 और PM10 का लेवल रीयल-टाइम में दिखना चाहिए। यह सारा डेटा सीधे BMC के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को भेजा जाएगा।
यह पूरी व्यवस्था बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश और MPCB के दिशा-निर्देशों के बाद लागू की गई है। इसके अलावा, BMC और IIT-Kanpur मिलकर MANAS प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहे हैं, जिसके तहत शहर में 75 कम लागत वाले सेंसर लगाए जा चुके हैं। जल्द ही इसका डैशबोर्ड भी शुरू होगा, जिससे लोगों को अपने इलाके के प्रदूषण की सटीक जानकारी मिल सकेगी।