Mumbai: धारावी प्रोजेक्ट के लिए मुलुंड की जमीन पर रोक, BMC ने पर्यावरण कारणों से प्रस्ताव लौटाया

Maharashtra/Mumbai: मुंबई के मुलुंड इलाके में पुराने डंपिंग ग्राउंड की 15 एकड़ जमीन को धारावी पुनर्विकास परियोजना (Dharavi Redevelopment Project) के लिए देने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी गई है। BMC की इम्प्रूवमेंट्स कमेटी न

Maharashtra/Mumbai: मुंबई के मुलुंड इलाके में पुराने डंपिंग ग्राउंड की 15 एकड़ जमीन को धारावी पुनर्विकास परियोजना (Dharavi Redevelopment Project) के लिए देने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी गई है। BMC की इम्प्रूवमेंट्स कमेटी ने मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को यह फैसला लिया। कमेटी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए इस प्रस्ताव को वापस भेज दिया गया है।

दरअसल, इस जमीन का इस्तेमाल कास्टिंग यार्ड और रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट लगाने के लिए किया जाना था। BMC की इम्प्रूवमेंट्स कमेटी की चेयरपर्सन संध्या दोषी ने बताया कि प्रस्ताव में कई बातें साफ नहीं थीं। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि घनी आबादी वाले मुलुंड इलाके में इस प्रोजेक्ट से पर्यावरण की कोई समस्या नहीं होगी। जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाएगा।

कांग्रेस कॉर्पोरेटर अशरफ आजमी ने भी इस फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि लैंडफिल साइट के इस्तेमाल को लेकर CPCB के कड़े नियम हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। नियमों के मुताबिक, बायोरेमेडिएशन पूरा होने के बाद कम से कम 15 साल तक ऐसी जमीन का इस्तेमाल इंसानी बस्तियों के लिए नहीं किया जा सकता।

दूसरी तरफ, धारावी पुनर्विकास परियोजना के सचिव विपिन पालीवाल ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद धारावी में रहने वाले 10 लाख से ज्यादा लोगों को बेहतर घर और जीवन देना है। इसके लिए सरकार जरूरी जमीन मुहैया करा रही है। इस 15 एकड़ जमीन पर करीब 2.5 से 3 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा है, जिसे हटाने का खर्च 20 करोड़ रुपये आने का अनुमान है। यह काम NMDPL कंपनी को करना था, जिसके बदले लीज रेंटल में छूट मिलनी थी। इस डील से BMC को करीब 83.44 करोड़ रुपये की शुद्ध कमाई होने की उम्मीद थी।

बता दें कि मुलुंड में ही 42.51 एकड़ साल्ट पैन की जमीन भी धारावी प्रोजेक्ट के लिए दी गई है, जहां किराये के मकान बनाने की योजना है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर भी MCZMA ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण जांच के आदेश दिए थे। इसके अलावा देवनार डंपिंग ग्राउंड की 124 एकड़ जमीन को लेकर भी पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य खतरों की चेतावनी दी है।