Mumbai: धारावी प्रोजेक्ट के लिए मुलुंड डंपिंग ग्राउंड की जमीन लीज पर देगा BMC, विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध
Maharashtra/Mumbai: मुंबई नगर निगम (BMC) की इम्प्रूवमेंट कमेटी ने मुलुंड डंपिंग ग्राउंड की 15 एकड़ जमीन को धारावी पुनर्विकास परियोजना (DRP) को लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
Maharashtra/Mumbai: मुंबई नगर निगम (BMC) की इम्प्रूवमेंट कमेटी ने मुलुंड डंपिंग ग्राउंड की 15 एकड़ जमीन को धारावी पुनर्विकास परियोजना (DRP) को लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को लिया गया। इस जमीन का इस्तेमाल कास्टिंग यार्ड, प्रीकास्ट एलिमेंट बनाने की फैक्ट्री और रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट लगाने के लिए किया जाएगा।
यह लीज पांच साल के लिए होगी और इसे नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (NMDPL) को दिया जाएगा। इस कंपनी में अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड की 80% हिस्सेदारी है, जबकि 20% हिस्सेदारी राज्य सरकार की स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के पास है। इस फैसले का शिव सेना (UBT) और कांग्रेस के सदस्यों ने जमकर विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि इस जमीन का उपयोग आम जनता की सुविधाओं के लिए होना चाहिए था।
इस पूरे सौदे से जुड़ी मुख्य शर्तें और वित्तीय जानकारी नीचे दी गई है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल जमीन | 15 एकड़ (60,703 वर्ग मीटर) |
| लीज की अवधि | 5 साल |
| किराया | 252 रुपये प्रति वर्ग मीटर महीना (सालाना 6% बढ़ोतरी) |
| BMC की कुल कमाई | लगभग 103.47 करोड़ रुपये (5 साल में) |
| कचरा सफाई लागत | 20.04 करोड़ रुपये (डेवलपर द्वारा वहन) |
| नेट रेंट (BMC को) | लगभग 83.44 करोड़ रुपये |
नियमों के मुताबिक, जमीन को ‘जैसा है वैसा ही’ (as is where is) आधार पर सौंपा जाएगा। डेवलपर को वहां मौजूद करीब 2.5 से 3 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे की सफाई करनी होगी, जिसका खर्च लीज रेंट में एडजस्ट किया जाएगा। इसके अलावा, डेवलपर को सभी पर्यावरण और कानूनी मंजूरियां खुद लेनी होंगी।
राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर काफी बहस हुई। बीजेपी और शिव सेना के पार्षदों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट धारावी के 10 लाख लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए जरूरी है। वहीं, पूर्व मेयर विशाखा राउत और कांग्रेस नेता अशोक अजीमी ने पर्यावरण नियमों का हवाला देते हुए कहा कि बायोरेमेडिएशन के बाद लैंडफिल साइट का इस्तेमाल इंसानी कामों के लिए 15 साल तक नहीं करना चाहिए। कांग्रेस ने इसे सरकारी जमीन का गलत इस्तेमाल बताया है।