Mumbai में जल संकट और गर्मी से निपटने के लिए BMC बचाएगी खोई हुई झीलें, कई तालाबों का होगा कायाकल्प

Maharashtra/Mumbai: मुंबई में बढ़ती गर्मी और पानी की किल्लत को देखते हुए BMC अब शहर की पुरानी और खोई हुई झीलों को फिर से जीवित करने की तैयारी में है। इस प्रोजेक्ट का मकसद पुराने जल निकायों को सुधारना, पानी की क्वालिटी बढ

Maharashtra/Mumbai: मुंबई में बढ़ती गर्मी और पानी की किल्लत को देखते हुए BMC अब शहर की पुरानी और खोई हुई झीलों को फिर से जीवित करने की तैयारी में है। इस प्रोजेक्ट का मकसद पुराने जल निकायों को सुधारना, पानी की क्वालिटी बढ़ाना और लोगों के लिए मनोरंजन के नए इलाके बनाना है। खास तौर पर उत्तर मुंबई के इलाकों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है ताकि पर्यावरण में सुधार हो सके।

हाल ही में 14 जून 2026 को खबर आई कि BMC पश्चिमी उपनगरों की दो ऐतिहासिक झीलों, भुजले तालाब और कमल तालाब के कायाकल्प का काम कर रही है। भुजले तालाब के पहले चरण का काम शुरू हो चुका है और वहां से 90 मीट्रिक टन गाद (silt) निकाली गई है। केंद्रीय मंत्री और उत्तर मुंबई के सांसद पीयूष गोयल ने इन तालाबों का निरीक्षण किया और बताया कि अगले छह महीनों में इन दोनों झीलों का काम पूरा होने की उम्मीद है।

शहर के अन्य हिस्सों में भी काम तेजी से चल रहा है। पवई झील के पास सीवेज पाइपलाइन का प्रोजेक्ट अपने आखिरी चरण में है और जून के अंत तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। इससे अक्टूबर तक पानी की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है। वहीं, बांद्रा तालाब को भी साफ करने के लिए पहली बार उसका पूरा पानी निकाला गया है। यहाँ गाद निकालने के बाद इसे सुंदर बनाया जाएगा और पास में 1 MLD का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) भी लगाया जाएगा।

प्रशासन ने इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुछ खास नियम तय किए हैं। यह काम पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर होगा और इसके लिए राज्य सरकार से NOC भी मिल चुकी है। BMC का पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग इसके लिए एक एनवायरमेंटल एडवाइजर भी नियुक्त करेगा।

अधिकारियों के मुताबिक, शहर में गायब हो चुके प्राकृतिक जल निकायों की पहचान की जा रही है ताकि उन्हें ‘ब्लू जोन’ में बदला जा सके। इससे शहरी इलाकों में गर्मी का असर कम होगा। फिलहाल मालाड, मालवणी, मनोरि, मध, एरंगल और दरवली जैसे इलाकों की कुल 15 झीलों को पुनर्जीवित करने के लिए चुना गया है।