Mumbai के बीच पर मिला 25 फुट लंबा ब्लू व्हेल का बच्चा, कई एजेंसियों ने मिलकर चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

Maharashtra: मुंबई के एक भीड़भाड़ वाले बीच पर 27 जून की सुबह करीब 6 बजे एक 7.6 मीटर (25 फुट) लंबा ब्लू व्हेल का बच्चा मिला। मछुआरों और स्थानीय लोगों ने इसे देखते ही इसकी जानकारी दी, जिसके बाद प्रशासन और वन्यजीव विशेषज्ञो

Maharashtra: मुंबई के एक भीड़भाड़ वाले बीच पर 27 जून की सुबह करीब 6 बजे एक 7.6 मीटर (25 फुट) लंबा ब्लू व्हेल का बच्चा मिला। मछुआरों और स्थानीय लोगों ने इसे देखते ही इसकी जानकारी दी, जिसके बाद प्रशासन और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, काफी कोशिशों के बाद भी इस व्हेल बच्चे को बचाया नहीं जा सका और उसकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद सरकारी नियमों के मुताबिक तुरंत एक्शन लिया गया। ब्लू व्हेल वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की शेड्यूल 1 प्रजाति में आती है, इसलिए इसकी जानकारी सबसे पहले लोकल स्ट्रैंडिंग नेटवर्क और फिर वन विभाग को दी गई। मौके पर मुंबई पुलिस, फायर ब्रिगेड, BMC और महाराष्ट्र सुरक्षा बल की टीमें पहुंचीं। रेस्क्यू ऑपरेशन में वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक बनाने वाले मजदूरों ने भी मदद की और भारी क्रेन मशीनें लगाई गईं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जब इतनी बड़ी व्हेल पानी से बाहर आती है, तो पानी का सहारा न मिलने के कारण उनके अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं, जिससे उनका बचना मुश्किल होता है। यह व्हेल बच्चा पत्थरों से टकराने की वजह से काफी जख्मी हो चुका था।

केंद्र सरकार की ‘मरीन मेगा फॉना स्ट्रैंडिंग मैनेजमेंट गाइडलाइन्स’ के तहत इस मामले को संभाला गया। प्रोटोकॉल के अनुसार, मृत व्हेल के शरीर को बांद्रा से ट्रक और क्रेन के जरिए वर्सोवा बीच ले जाया गया और वहां उसे दफना दिया गया। मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए शरीर के सैंपल लेकर पोस्टमॉर्टम विश्लेषण के लिए भेजे गए हैं।

मैंग्रोव फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र के तटों पर व्हेल का मिलना काफी दुर्लभ है। साल 2020-21 में कुल 109 घटनाओं में से केवल 6 बार ही व्हेल मिली थीं। इस पूरे ऑपरेशन में कोस्टल कंजर्वेशन फाउंडेशन और रीफवॉच जैसे कई एनजीओ ने भी मदद की।