Bihar के मजदूर के बेटे ने रचा इतिहास, World Yogasana Championship में जीता गोल्ड मेडल
West Champaran: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के एक मजदूर के बेटे ने पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। योगापट्टी प्रखंड के बासोपट्टी गांव के रहने वाले 17 साल के सारांश कुमार ने गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित प्रथम वि
West Champaran: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के एक मजदूर के बेटे ने पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। योगापट्टी प्रखंड के बासोपट्टी गांव के रहने वाले 17 साल के सारांश कुमार ने गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप 2026 में स्वर्ण पदक जीता है। सारांश ने लयबद्ध युगल योगासन (Rhythmic Pair Yogasana) स्पर्धा में अपनी प्रतिभा दिखाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
सारांश की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता जितेंद्र राम शुरू में उनके योग सीखने के फैसले से खुश नहीं थे। उनके पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई करे और बड़ा अधिकारी बने या किसी दूसरे खेल में अपना करियर बनाए। लेकिन सारांश ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि योग के क्षेत्र में भी दुनिया जीती जा सकती है। सारांश की मां रुना देवी आंगनबाड़ी सेविका के रूप में काम करती हैं।
यह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 4 से 8 जून 2026 तक अहमदाबाद के द एरेना बाय ट्रांसस्टेडिया के ईका एरिना में हुई थी। इस चैंपियनशिप का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इस आयोजन में दुनिया के करीब 78 से 79 देशों के 500 से ज्यादा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। भारत इस प्रतियोगिता में सबसे ऊपर रहा और कुल 114 पदक जीते, जिसमें 102 गोल्ड, 9 सिल्वर और 3 ब्रोंज मेडल शामिल हैं।
सारांश ने अपनी इस बड़ी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और कोच पवन कुमार के मार्गदर्शन को दिया है। उन्होंने बेतिया की योग स्पोर्ट्स एकेडमी में कड़ा अनुशासन और ट्रेनिंग ली। इस प्रतियोगिता को विश्व योगासन, योगासन भारत और भारतीय ओलंपिक संघ ने आयोजित किया था, जिसे आयुष मंत्रालय और खेल मंत्रालय का पूरा समर्थन मिला।
मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास करने वाले सारांश अब भविष्य में कॉमनवेल्थ और ओलंपिक खेलों में पदक जीतने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। बिहार योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन और राज्य खेल प्राधिकरण ने भी सारांश जैसे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में मदद की है।