Bihar में मौसम का दोहरा वार, उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा तो दक्षिण बिहार में सूखे जैसे हालात

Bihar: बिहार में इस साल मानसून का मिजाज काफी अजीब है। एक तरफ उत्तर बिहार के कई जिलों में भारी बारिश की वजह से नदियां उफान पर हैं और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण बिहार के इलाके सूखे जैसी स्थिति से जूझ

Bihar: बिहार में इस साल मानसून का मिजाज काफी अजीब है। एक तरफ उत्तर बिहार के कई जिलों में भारी बारिश की वजह से नदियां उफान पर हैं और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण बिहार के इलाके सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहे हैं। मौसम विभाग ने चंपारण और अररिया समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश की वजह से कोसी और गंडक जैसी बड़ी नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। कोसी नदी खगड़िया के बलतारा में खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज की गई, जबकि गंडक नदी गोपालगंज के डुमरिया घाट पर खतरे के निशान को पार कर चुकी है। बराजों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण निचले इलाकों में पानी भरना शुरू हो गया है। पश्चिम चंपारण और सीतामढ़ी के कई गांवों में 300 से ज्यादा घर पानी में डूब चुके हैं और कई इलाकों का संपर्क टूट गया है।

उत्तर बिहार की इस स्थिति के उलट दक्षिण बिहार में बारिश की भारी कमी है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 38 में से 29 जिले बारिश की कमी वाले क्षेत्र में हैं और 7 जिलों में बहुत ज्यादा कमी देखी गई है। इसका सीधा असर खेती पर पड़ा है, खासकर धान की रोपाई पिछले साल के मुकाबले 16 प्रतिशत कम रही है। किसानों की फसलें सूख रही हैं, जिसे देखते हुए कुछ राजनीतिक दलों ने सरकार से राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने और मुआवजे की मांग की है।

हालात को देखते हुए Water Resources Department ने सभी अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने कहा कि सरकार उत्तर बिहार में बाढ़ और दक्षिण बिहार में सूखे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। राज्यपाल ने भी आपदा प्रबंधन में ‘जीरो कैजुअल्टी’ यानी शून्य जनहानि का लक्ष्य रखने को कहा है ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। IMD ने आने वाले दिनों में दरभंगा और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है।