Bihar के गया में शिक्षक बने बृजेश, करंट से गंवाए दोनों हाथ लेकिन पैरों से लिख अपनी तकदीर बदल दी
Bihar: गया जिले के रहने वाले बृजेश कुमार ने दुनिया को बता दिया कि अगर मन में कुछ करने की इच्छा हो, तो शरीर की कोई भी कमी रास्ता नहीं रोक सकती। एक भयानक हादसे में अपने दोनों हाथ खोने के बाद, बृजेश ने हार मानने के बजाय पैर
Bihar: गया जिले के रहने वाले बृजेश कुमार ने दुनिया को बता दिया कि अगर मन में कुछ करने की इच्छा हो, तो शरीर की कोई भी कमी रास्ता नहीं रोक सकती। एक भयानक हादसे में अपने दोनों हाथ खोने के बाद, बृजेश ने हार मानने के बजाय पैरों से लिखना सीखा और आज वह कई गरीब बच्चों के भविष्य को संवार रहे हैं।
बृजेश के साथ यह हादसा साल 2015 में हुआ था जब वह मैट्रिक की पढ़ाई कर रहे थे। उस समय वह 11,000 वोल्ट के बिजली के करंट की चपेट में आ गए थे, जिससे उन्हें गंभीर रूप से जलन हुई। उनकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उनके दोनों हाथ काटने पड़े। करीब 4-5 साल तक उनका इलाज चला, लेकिन इस मुश्किल समय में भी उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी।
बृजेश ने अपने पैरों से लिखना सीखा और इसी मेहनत के दम पर साल 2023 में अपनी इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। वर्तमान में वह अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं। वह अपने फोन का इस्तेमाल भी पैरों और मुंह की मदद से करते हैं।जेश के पिता एक किसान और दिहाड़ी मजदूर हैं, लेकिन परिवार के सहयोग और अपने जुनून से उन्होंने खुद को एक शिक्षक के रूप में स्थापित किया।
आज बृजेश उन बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते हैं जिनके पास संसाधनों की कमी है। पढ़ाते समय वह अपने कटे हुए हाथ पर मार्कर बांधकर बोर्ड पर लिखते हैं। उनकी यह कहानी उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो छोटी सी मुश्किल आने पर हिम्मत हार जाते हैं।
बिहार सरकार भी दिव्यांगजनों के लिए कई योजनाएं चला रही है। राज्य में ‘मुख्यमंत्री दिव्यांगजन उद्यमी योजना’ के तहत 5 लाख रुपये की सब्सिडी और 5 लाख का ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है। इसके अलावा, UPSC और BPSC की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले दिव्यांग उम्मीदवारों को क्रमशः 1 लाख और 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। सरकार 2026-27 के बजट में दिव्यांग छात्रों के लिए 7,000 विशेष शिक्षकों की भर्ती और विशेष स्कूलों के निर्माण की योजना भी बना रही है।