Bihar: सुपौल जिले में पुरानी यादों और ज्ञान को सहेजने का काम अब तेजी से आगे बढ़ा है। जिला प्रशासन और ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत शुरू हुए अभियान में युवाओं ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। डीएम सावन कुमार की अपील
Bihar: सुपौल जिले में पुरानी यादों और ज्ञान को सहेजने का काम अब तेजी से आगे बढ़ा है। जिला प्रशासन और ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत शुरू हुए अभियान में युवाओं ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। डीएम सावन कुमार की अपील पर युवाओं ने खोजबीन की और जिले की बौद्धिक विरासत से जुड़े 20 बेहद दुर्लभ दस्तावेज़ खोज निकाले हैं।
कौन हैं वो लोग जिन्होंने इन पांडुलिपियों को खोजा
इस अभियान में संगीत शिक्षिका दीपिका चंद्रा और ‘माय भारत’ के पूर्व वॉलंटियर इन्दल कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई। इन दोनों ने मेहनत करके 20 महत्वपूर्ण पांडुलिपियों का पता लगाया। ये सभी अमूल्य दस्तावेज़ मलाढ़ गांव के रहने वाले कृपानंद झा और बिमलानंद झा के निजी संग्रह से मिले हैं।
इन दुर्लभ दस्तावेजों की क्या है खासियत
ये पांडुलिपियां संस्कृत और मिथिलाक्षर लिपि में लिखी गई हैं। इनकी उम्र लगभग 153 वर्ष बताई जा रही है। इन दस्तावेजों के मिलने से सुपौल जिले की पुरानी सभ्यता, ज्ञान और पहचान को बचाने में मदद मिलेगी। जिला प्रशासन का मानना है कि यह कदम जिले की बौद्धिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में बहुत बड़ा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सुपौल में कितनी और कितनी पुरानी पांडुलिपियां मिली हैं
सुपौल में कुल 20 दुर्लभ पांडुलिपियां मिली हैं, जिनकी उम्र लगभग 153 वर्ष है और ये संस्कृत व मिथिलाक्षर में लिखी गई हैं।
यह अभियान किसके नेतृत्व में चलाया जा रहा है
यह बौद्धिक विरासत संरक्षण अभियान जिला प्रशासन सुपौल द्वारा डीएम सावन कुमार के आह्वान पर ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत चलाया जा रहा है।