Bihar: वैशाली जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। STF और ANTF की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 33 लाख रुपये की हेरोइन बरामद की है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 7 तस्करों को गिरफ्तार किया
Bihar: वैशाली जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। STF और ANTF की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 33 लाख रुपये की हेरोइन बरामद की है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 7 तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिनका नेटवर्क बिहार से लेकर असम तक फैला हुआ था।
कैसे हुआ यह बड़ा खुलासा और कितनी हुई बरामदगी
बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने वैशाली में एक साथ रेड मारी। इस ऑपरेशन में पुलिस ने 33 लाख रुपये की हेरोइन जब्त की और मौके से 7 लोगों को दबोचा। जांच में पता चला है कि यह सिंडिकेट बहुत बड़े स्तर पर काम कर रहा था और इसका जाल बिहार से असम तक फैला हुआ था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
नशे के खिलाफ बिहार पुलिस की अब तक की कार्रवाई
बिहार पुलिस के डीजी (ऑपरेशंस और एसटीएफ) कुंदन कृष्णन और उप महानिरीक्षक संजय कुमार सिंह के मुताबिक, राज्य में अपराधियों और ड्रग तस्करों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। पुलिस अब ड्रोन और हवाई निगरानी का इस्तेमाल कर रही है ताकि तस्करों को पकड़ा जा सके। हाल के दिनों में पुलिस ने कई बड़ी सफलताएं पाई हैं:
- 26 अप्रैल 2026 को वैशाली से ही एक महिला समेत 3 तस्कर पकड़े गए, जो सिलीगुड़ी से हेरोइन ला रहे थे।
- 24 मार्च 2026 को दरभंगा और पटना से 69 लाख रुपये की हेरोइन जब्त की गई, जिसका संबंध असम के सिलचर से था।
- 21 मार्च 2026 को समस्तीपुर में 6 लाख रुपये की हेरोइन के साथ दो आरोपी पकड़े गए थे।
अधिकारियों का कहना है कि जनवरी से अप्रैल के बीच चलाए गए अभियानों से आपराधिक नेटवर्क कमजोर हुआ है और आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
वैशाली में एसटीएफ ने कितनी हेरोइन बरामद की है?
वैशाली में एसटीएफ और एएनटीएफ की संयुक्त छापेमारी में 33 लाख रुपये मूल्य की हेरोइन बरामद की गई है और 7 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
इस ड्रग सिंडिकेट का नेटवर्क कहां-कहां फैला था?
पकड़े गए तस्करों का नेटवर्क बिहार से लेकर असम तक फैला हुआ था। जांच में सामने आया है कि नशीले पदार्थों की सोर्सिंग असम के सिलचर जैसे इलाकों से की जा रही थी।