Bihar : बिहार के किसानों के लिए खेती अब और आसान होगी क्योंकि राज्य मिट्टी की जांच के मामले में अग्रणी बन गया है। पिछले दो सालों में करीब 8 लाख मिट्टी के नमूनों की जांच की गई है, जिससे किसानों को यह पता चलेगा कि उनकी जमीन
Bihar : बिहार के किसानों के लिए खेती अब और आसान होगी क्योंकि राज्य मिट्टी की जांच के मामले में अग्रणी बन गया है। पिछले दो सालों में करीब 8 लाख मिट्टी के नमूनों की जांच की गई है, जिससे किसानों को यह पता चलेगा कि उनकी जमीन को किस खाद की जरूरत है। इससे खेती की लागत कम होगी और पैदावार बढ़ेगी।
मिट्टी जांच के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?
बिहार कृषि विभाग ने जांच के दायरे को बढ़ाने के लिए 25 जिलों में 32 नई अनुमंडल स्तरीय प्रयोगशालाएं खोली हैं। अब राज्य के सभी 38 जिलों में जिला स्तरीय जांच की सुविधा मौजूद है। इसके अलावा 9 मोबाइल लैब और 72 ग्राम स्तरीय लैब भी काम कर रही हैं। जांच के लिए pH, नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे 12 मुख्य मापदंडों का विश्लेषण किया जाता है।
डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड से कैसे होगा फायदा?
अब किसानों को मिट्टी की रिपोर्ट के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड सीधे WhatsApp पर भेजे जा रहे हैं। इन कार्डों में 100 से ज्यादा फसलों के लिए खाद की सही सलाह दी गई है। यह कार्ड तीन साल तक मान्य रहते हैं। नमूना लेने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें खेत की लोकेशन और फोटो भी दर्ज की जाती है।
केंद्र सरकार के बजट में कटौती और हालिया अपडेट
एक तरफ जहां राज्य ने तेजी दिखाई है, वहीं केंद्र सरकार ने साल 2026-27 के लिए बिहार के 6 लाख नमूनों के प्रस्ताव के मुकाबले सिर्फ 1.5 लाख की मंजूरी दी है। इस 75% कटौती के बाद कृषि विभाग अब नए लक्ष्य तय कर रहा है। वहीं, भागलपुर में हाल ही में एक लैब के निरीक्षण के दौरान उपकरणों पर धूल मिलने से अधिकारियों ने नाराजगी जताई और सुधार के निर्देश दिए हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड कैसे मिलता है और इसकी वैधता कितनी है?
यह कार्ड किसानों के मोबाइल पर WhatsApp के जरिए भेजा जाता है। इसकी वैधता तीन वर्ष तक होती है और इसमें 100 से अधिक फसलों के लिए उर्वरक संबंधी जानकारी दी गई है।
मिट्टी की जांच में किन चीजों का विश्लेषण किया जाता है?
मिट्टी के नमूनों की जांच 12 प्रमुख मापदंडों पर होती है, जिनमें pH, EC, OC, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक, कॉपर, मैंगनीज, आयरन, सल्फर और बोरॉन शामिल हैं।