Bihar में निजी स्कूलों के लिए मान्यता के नियम हुए सख्त, अब खेल मैदान और लैब के बिना नहीं मिलेगी संबद्धता

Bihar: बिहार सरकार ने निजी स्कूलों की मान्यता और संबद्धता (Affiliation) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब बिना खेल मैदान, पर्याप्त जमीन और लैब जैसी बुनियादी सुविधाओं के स्कूलों को मान्यता नहीं मिलेगी। सरकार ने इस संबं

Bihar: बिहार सरकार ने निजी स्कूलों की मान्यता और संबद्धता (Affiliation) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब बिना खेल मैदान, पर्याप्त जमीन और लैब जैसी बुनियादी सुविधाओं के स्कूलों को मान्यता नहीं मिलेगी। सरकार ने इस संबंध में नई नियमावली की अधिसूचना बिहार गजट में जारी कर दी है, जिससे अब स्कूलों को शिक्षा की गुणवत्ता और बेहतर माहौल सुनिश्चित करना होगा।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति संबद्धता (संशोधन) नियमावली, 2026 को 18 जून 2026 से लागू कर दिया गया है। नए नियमों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों के लिए कम से कम 6000 वर्ग मीटर जमीन होना जरूरी है, जिसमें 2000 वर्ग मीटर सिर्फ खेल मैदान के लिए आरक्षित होना चाहिए। शहरी इलाकों में पटना के लिए 3200 वर्ग मीटर और अन्य शहरों के लिए 4000 वर्ग मीटर जमीन की शर्त रखी गई है। यह जमीन स्कूल के नाम पर रजिस्टर्ड होनी चाहिए या कम से कम 30 साल की लीज पर होनी चाहिए।

इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी कड़े मानक तय किए गए हैं। स्कूलों में कम से कम छह क्लासरूम होने चाहिए, जिनमें से हर एक का साइज 35-35 वर्ग मीटर हो। साथ ही फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के लिए तीन अलग लैब, 50 वर्ग मीटर का कंप्यूटर रूम और 50 वर्ग मीटर की लाइब्रेरी होना अनिवार्य है। मान्यता के लिए आवेदन करने वाले संस्थानों को 15,000 रुपये की ऑनलाइन निरीक्षण फीस भी जमा करनी होगी।

सुविधा/नियम मानक/शर्त
ग्रामीण क्षेत्र जमीन 6000 वर्ग मीटर (2000 वर्ग मीटर खेल मैदान)
पटना (शहरी) जमीन 3200 वर्ग मीटर
अन्य शहर जमीन 4000 वर्ग मीटर
क्लासरूम साइज 35 वर्ग मीटर (न्यूनतम 6 कमरे)
लैब और लाइब्रेरी 3 साइंस लैब, 50 वर्ग मीटर कंप्यूटर रूम और लाइब्रेरी
निरीक्षण शुल्क 15,000 रुपये (ऑनलाइन)

शिक्षा विभाग ने फीस और अन्य शुल्कों को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आदेश दिया है कि सभी निजी स्कूल अपना पूरा फीस स्ट्रक्चर सार्वजनिक करें। स्कूल अब छात्रों से री-एनरोलमेंट फीस या अन्य प्रतिबंधित शुल्क नहीं ले पाएंगे। साथ ही, अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताब, यूनिफॉर्म या स्टडी मटेरियल खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। फीस बकाया होने की वजह से किसी भी छात्र को परीक्षा से नहीं रोका जाएगा और न ही उसका रिजल्ट रोका जाएगा।

कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों के लिए जिला शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी जांच करेगी कि स्कूल में शिक्षकों की संख्या और बुनियादी ढांचा सही है या नहीं। इसके अलावा, सरकार ने 11 जून 2026 को सरकारी शिक्षकों के लिए भी निर्देश जारी किए हैं कि वे किसी भी कोचिंग सेंटर या प्राइवेट ट्यूशन में नहीं पढ़ाएंगे, ऐसा करने पर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।