Bihar: बिहार के अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान ने घोषणा की है कि नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप के तहत अब बिहार के छात्र भी विदेशों
Bihar: बिहार के अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान ने घोषणा की है कि नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप के तहत अब बिहार के छात्र भी विदेशों में जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। इस पढ़ाई पर होने वाला सारा खर्च, चाहे वह 10 लाख रुपये हो या 1 करोड़ रुपये, पूरी तरह से बिहार सरकार वहन करेगी। इस कदम से गरीब और प्रतिभाशाली छात्रों के विदेश में पढ़ने का सपना सच हो सकेगा।
स्कॉलरशिप के लिए कौन से छात्र होंगे पात्र और क्या है उम्र सीमा
इस योजना का लाभ केवल उन छात्रों को मिलेगा जिनकी पारिवारिक सालाना आय 8 लाख रुपये से कम है। इसके अलावा आवेदन करने वाले छात्र की उम्र 1 अप्रैल 2026 तक 35 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यह स्कॉलरशिप केवल मास्टर डिग्री और पीएचडी जैसे उच्च पाठ्यक्रमों के लिए दी जाएगी, इसे ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। चयन के लिए छात्र को दुनिया की टॉप 500 क्यूएस (QS) रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना अनिवार्य होगा।
छात्रों को सरकार की तरफ से क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी
बिहार सरकार हर साल करीब 125 छात्रों को इस योजना के तहत विदेश भेजेगी, जिसमें 30 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं। सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक मदद में कई तरह के खर्च शामिल होंगे जिन्हें नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| सुविधा का नाम |
विवरण |
| ट्यूशन फीस |
यूनिवर्सिटी की पूरी पढ़ाई का खर्च |
| रहने का खर्च |
विदेश में रहने और खाने-पीने का भत्ता |
| वीजा और यात्रा |
वीजा फीस और इकोनॉमी क्लास का हवाई टिकट |
| बीमा |
मेडिकल इंश्योरेंस की पूरी राशि |
आवेदन करने का तरीका और जरूरी नियम
इच्छुक छात्रों को आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, शैक्षणिक मार्कशीट और विदेशी यूनिवर्सिटी का एडमिशन लेटर जरूरी होगा। योजना की एक मुख्य शर्त यह है कि पढ़ाई पूरी करने के 30 दिनों के भीतर छात्र को भारत वापस आना होगा और कम से कम एक साल तक देश में ही रहना होगा। यदि कोई छात्र इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे स्कॉलरशिप की पूरी राशि ब्याज के साथ सरकार को वापस करनी पड़ सकती है।