Bihar: ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुल बनाने में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग ने आठ ठेकेदारों को काली सूची (Blacklist) में डाल दिया है। यह कार्रवाई
Bihar: ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुल बनाने में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग ने आठ ठेकेदारों को काली सूची (Blacklist) में डाल दिया है। यह कार्रवाई उन संवेदकों पर हुई है जिन्होंने काम में कोताही बरती या घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया। विभाग ने साफ कर दिया है कि अब काम में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट क्यों किया गया और कितनी सज़ा मिली
ग्रामीण कार्य विभाग ने यह कार्रवाई बिहार ठेकेदारी निबंधन नियमावली 2007 के तहत की है। जांच में पाया गया कि कुछ ठेकेदारों ने सड़कों के पांच साल के रखरखाव (Maintenance) में लापरवाही की, जबकि कुछ ने काम अधूरा छोड़ दिया। विभाग को गलत जानकारी देने और गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर भी गाज गिरी है। कुल 8 ठेकेदारों में से 4 को 4 साल के लिए और बाकी 4 ठेकेदारों को 3 साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है।
किन योजनाओं में हुई गड़बड़ी और क्या है विभाग की नीति
यह पूरी कार्रवाई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति के तहत बनी सड़कों के निरीक्षण के बाद हुई है। विभाग ने अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है, जिसका मतलब है कि भ्रष्टाचार या लापरवाही मिलने पर सीधे कार्रवाई होगी। विभाग का लक्ष्य है कि ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं में पारदर्शिता रहे और समय पर अच्छी सड़कें बनकर तैयार हों। अनुबंध की शर्तों को तोड़ने वाले अन्य ठेकेदारों पर भी भविष्य में ऐसी ही कार्रवाई जारी रहेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार में कितने ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया है और कितने समय के लिए?
कुल 8 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। इनमें से 4 ठेकेदारों को 4 साल के लिए और अन्य 4 ठेकेदारों को 3 साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है।
ठेकेदारों पर यह कार्रवाई किन कारणों से की गई है?
मुख्य कारणों में सड़क निर्माण और रखरखाव में लापरवाही, काम अधूरा छोड़ना, विभाग को गलत जानकारी देना और घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग करना शामिल है।