Bihar: राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत को दूर करने और जमीन के नीचे पानी के स्तर को बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ के तहत अब गांवों म
Bihar: राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत को दूर करने और जमीन के नीचे पानी के स्तर को बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ के तहत अब गांवों में सोखता (सोक पिट) का निर्माण कराया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग ने इस योजना को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं ताकि आने वाले समय में जल संकट से निपटा जा सके।
सोखता निर्माण का क्या है उद्देश्य और तरीका
इस योजना का मुख्य लक्ष्य बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाकर उसे जमीन के अंदर भेजना है। सोखता का निर्माण मुख्य रूप से सार्वजनिक हैंडपंपों और निजी घरों के पास किया जा रहा है। MNREGA योजना के जरिए इन गड्ढों को बनाया जा रहा है। अलग-अलग साइज के सोखता बनाए जा रहे हैं, जिसमें 4x4x7 फीट के गड्ढे पर करीब 17,500 रुपये और 6x6x8 फीट के गड्ढे पर लगभग 22,456 रुपये की लागत आ रही है।
जिलों में काम की क्या है स्थिति
बेगूसराय जिले में जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत अब तक 808 सार्वजनिक कुओं का जीर्णोद्धार किया गया है और 723 सोखता बनाए गए हैं। हालांकि, खोदावंदपुर ब्लॉक में लक्ष्य के मुकाबले काम थोड़ा पीछे है, जहां 48 में से 37 सोखता ही पूरे हुए हैं। प्रशासन ने निर्देश दिया है कि बारिश शुरू होने से पहले बाकी 11 गड्ढे भी तैयार कर लिए जाएं ताकि जलजमाव की समस्या न हो।
जन भागीदारी और सरकारी निर्देश
खगड़िया की DDC श्वेता भारती ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों के आसपास सोखता बनाएं। 1 मई से 31 मई 2026 तक ‘जल संरक्षण जन भागीदारी 2.0’ अभियान मिशन मोड पर चलाया जाएगा। मुंगेर सदर के BDO विकास कुमार और प्रोग्राम ऑफिसर संजीव कुमार दास ने पंचायत प्रतिनिधियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य में कोई लापरवाही न बरती जाए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सोखता (Soak Pit) निर्माण के लिए कितना पैसा खर्च हो रहा है
MNREGA के तहत अलग-अलग साइज के सोखता बन रहे हैं। 4x4x7 फीट के गड्ढे की लागत लगभग 17,500 रुपये और 6x6x8 फीट के गड्ढे की लागत करीब 22,456 रुपये आ रही है।
यह योजना किस अभियान का हिस्सा है
यह निर्माण मुख्यमंत्री के ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ का हिस्सा है, जिसे ग्रामीण विकास विभाग द्वारा लागू किया जा रहा है।