Bihar अब आम उत्पादन में देश में तीसरे नंबर पर, विदेशों में भी पहुंचेगा दीघा मालदा और जर्दालू आम

Bihar: बिहार के किसानों की मेहनत रंग लाई है और अब राज्य आम उत्पादन के मामले में पूरे देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। हाल ही में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आम महोत्सव आयोजित किए गए, जहां आम की सैकड़ों दुर्लभ और आधु

Bihar: बिहार के किसानों की मेहनत रंग लाई है और अब राज्य आम उत्पादन के मामले में पूरे देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। हाल ही में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आम महोत्सव आयोजित किए गए, जहां आम की सैकड़ों दुर्लभ और आधुनिक किस्में प्रदर्शित की गईं। सरकार अब बिहार के आमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।

भागलपुर के बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर में ‘राष्ट्रीय आम महोत्सव 2026’ का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 500 से अधिक किस्मों की प्रदर्शनी लगाई गई। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने किसानों की सराहना की और उन्हें आधुनिक खेती से जुड़ने की सलाह दी। कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने बताया कि सबौर की धरती आम अनुसंधान के लिए बहुत पुरानी है और दुनिया की पहली संकर आम किस्म 1951 में यहीं विकसित हुई थी।

पटना में भी आम के कई महोत्सव हुए। नाबार्ड ने 25 और 26 जून को एक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसका मकसद किसानों को सीधे खरीदारों और थोक व्यापारियों से जोड़ना था ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और किसानों को सही दाम मिले। सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने किसानों से नई तकनीक अपनाने और रसायन-मुक्त आम उगाने पर जोर दिया। वहीं, बिहार नर्सरीमेन एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘द्वितीय ग्रैंड मैंगो फेस्टिवल’ में मियाजाकी और जर्दालू जैसी 100 से अधिक दुर्लभ किस्में दिखाई गईं, जिसका उद्घाटन कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया।

बिहार सरकार अब उन आम की प्रजातियों को बचाने की योजना बना रही है जो धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। इसके लिए हर जिले में एक विशेष मॉडल उद्यान विकसित किया जाएगा। इसके अलावा, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उद्यान निदेशालय ने दीघा मालदा आम को अमेरिका और दुबई भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। जीआई टैग वाले जर्दालू आम पहले से ही अमेरिका, जापान और कोरिया जैसे देशों में भेजे जा रहे हैं।

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने दरभंगा और मधुबनी में ‘मिथिला मल्टी-कमोडिटी हॉर्टिकल्चर क्लस्टर’ परियोजना को मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 98.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे लगभग 19,200 किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इसमें मुख्य रूप से आम और केले की खेती पर ध्यान दिया जाएगा ताकि बिहार के फलों को दुनिया भर में पहचान मिल सके।