Bihar: बिहार के लोगों के लिए हवाई सफर अब और आसान होने वाला है। रक्सौल में एक नए और भव्य हवाई अड्डे का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी सेवाओं का टेंडर जारी कर दिया गया है, जिसे जमा क
Bihar: बिहार के लोगों के लिए हवाई सफर अब और आसान होने वाला है। रक्सौल में एक नए और भव्य हवाई अड्डे का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी सेवाओं का टेंडर जारी कर दिया गया है, जिसे जमा करने की आखिरी तारीख 1 जून 2026 तय की गई है।
रक्सौल एयरपोर्ट की क्या हैं खासियतें?
रक्सौल एयरपोर्ट का रनवे पटना एयरपोर्ट से भी करीब 360 मीटर बड़ा होगा। इसकी कुल लंबाई 2,360 मीटर होगी, जिससे यहाँ Boeing 737 और Airbus A320 जैसे बड़े विमान आसानी से लैंड और टेक-ऑफ कर सकेंगे। सबसे खास बात यह है कि रनवे का एक हिस्सा तिलावे नदी के ऊपर एक विशेष पुल पर बनाया जाएगा, जो इसे देश के चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल करेगा।
जमीन अधिग्रहण और काम पूरा होने का समय
इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 139 एकड़ जमीन चाहिए, जिसमें से 70% जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। बिहार सरकार ने फरवरी 2026 में इसके लिए 207.70 करोड़ रुपये जारी किए थे। कंसल्टेंट के चयन के बाद 3 महीने में डिजाइन तैयार होगा और निर्माण एजेंसी को काम पूरा करने के लिए 18 महीने का समय मिलेगा। सब कुछ सही रहा तो जून 2028 तक प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा और करीब 20 महीनों में हवाई सेवा शुरू हो सकती है।
रणनीतिक महत्व और सरकारी बयान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 6 मई 2026 को टेंडर की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि इससे सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ेगी और व्यापार व पर्यटन को फायदा होगा। सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने भी इलाके का निरीक्षण कर रनवे विस्तार की पुष्टि की है। इस एयरपोर्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आपात स्थिति में भारतीय वायु सेना के Rafale, Tejas और MiG-29 जैसे लड़ाकू जेट भी यहाँ उतर सकेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रक्सौल एयरपोर्ट का रनवे कितना बड़ा होगा?
रक्सौल हवाई अड्डे का रनवे 2,360 मीटर लंबा होगा, जो पटना एयरपोर्ट से लगभग 360 मीटर ज्यादा है। यह बोइंग 737 और एयरबस ए320 जैसे बड़े विमानों के लिए सक्षम होगा।
एयरपोर्ट का काम कब तक पूरा होने की उम्मीद है?
प्रोजेक्ट के जून 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है। निर्माण एजेंसी को काम पूरा करने के लिए 18 महीने का समय दिया जाएगा, जिसके बाद ट्रायल लैंडिंग की प्रक्रिया होगी।