Bihar: उत्तर बिहार के रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने 9 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिहार को 10,379 करोड़ रुपये का बजट मिला है, जो पिछले सालों के मुकाबले काफी ज्यादा है।
Bihar: उत्तर बिहार के रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने 9 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिहार को 10,379 करोड़ रुपये का बजट मिला है, जो पिछले सालों के मुकाबले काफी ज्यादा है। इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य मकसद ट्रेनों की देरी को कम करना, भीड़भाड़ से राहत दिलाना और दूर-दराज के इलाकों को रेल लाइन से जोड़ना है।
उत्तर बिहार के लिए कौन से हैं 9 प्रमुख प्रोजेक्ट्स?
रेलवे ने उत्तर बिहार के लिए कई नई लाइनें और दोहरीकरण के काम शुरू करने का फैसला किया है। इनमें कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट्स की जानकारी नीचे दी गई है:
| प्रोजेक्ट का नाम |
खासियत/दूरी |
अनुमानित लागत |
| पटना ब्रिज विस्तार |
गंगा नदी पर नया रेल लिंक (40 किमी) |
3,555 करोड़ रुपये |
| मुजफ्फरपुर-दरभंगा लाइन |
दूरी 24 किमी कम होगी (67.4 किमी) |
2,514 करोड़ रुपये |
| हाजीपुर-सुगौली लाइन |
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार |
2,087 करोड़ रुपये |
| खगड़िया-कुशेश्वरस्थान लाइन |
कृषि उत्पादों के लिए समर्पित लाइन |
1,511 करोड़ रुपये |
| नरकटियागंज-दरभंगा दोहरीकरण |
नेपाल सीमा व्यापार के लिए जरूरी (256 किमी) |
4,080 करोड़ रुपये |
| सकरी-फारबिसगंज प्रोजेक्ट |
गेज परिवर्तन और दोहरीकरण |
2,113 करोड़ रुपये |
| मुजफ्फरपुर-जनकपुर रोड |
बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए मददगार |
229 करोड़ रुपये |
इसके अलावा सीवान, सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और दरभंगा जिलों को राजधानी पटना से जोड़ने के लिए एक नया उपनगरीय परिवहन नेटवर्क बनाया जाएगा। साथ ही बिहार-नेपाल रेल कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए दोहरी रेल लाइन बिछाई जाएगी।
आम यात्रियों और युवाओं को क्या होगा फायदा?
इन प्रोजेक्ट्स से न केवल सफर आसान होगा बल्कि रोजगार के नए मौके भी मिलेंगे। ‘मिशन 3000 एमटी’ के तहत 2030 तक माल ढुलाई क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य है, जिससे बिहार एक लॉजिस्टिक हब बन सकता है। रेलवे में करीब 1.43 लाख पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, जिससे स्थानीय युवाओं को नौकरी मिलेगी।
स्टेशनों का विकास और सुरक्षा के नए इंतजाम
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत सहरसा, गया, मुजफ्फरपुर, लखीसराय और सलौना समेत बिहार के 98 स्टेशनों का चेहरा बदला जा रहा है। सुरक्षा के लिए पटना-डीडीयू-दिल्ली और डीडीयू-पटना-झाझा रूट पर स्वदेशी ‘कवच’ सिस्टम लगाया जा रहा है ताकि हादसों को रोका जा सके। वहीं, बक्सर, पटना, बेगूसराय और कटिहार जैसे शहरों से गुजरने वाली बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है।