Bihar: बिहार सरकार ने रेलवे की जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) को इस काम में तेजी लाने और विशेष अभियान
Bihar: बिहार सरकार ने रेलवे की जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) को इस काम में तेजी लाने और विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार इसे जनसुविधा से जुड़ा मामला मान रही है ताकि रेलवे के विकास कार्यों और सुविधाओं का विस्तार किया जा सके।
अतिक्रमण हटाने की क्या है प्रक्रिया और नियम
यह पूरी कार्रवाई बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम की धारा 3 के तहत की जाएगी। इसमें सबसे पहले कब्जा करने वालों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद धारा 6 के तहत अंतिम आदेश पास होगा। अगर कोई इस फैसले से सहमत नहीं है, तो वह धारा 11 के तहत अपील कर सकता है। सरकार ने साफ कर दिया है कि 30 साल या उससे ज्यादा समय से कब्जे में होने पर भी बिना वैध कागजात के मालिकाना हक नहीं माना जाएगा।
किसे माना जाएगा जमीन का असली मालिक
भूमि के मालिकाना हक को तय करने के लिए सरकार ने पुराने रिकॉर्ड्स को आधार बनाया है। इसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- केवल 1890-1920 के कैडेस्ट्रल सर्वे को ही मूल भूमि अभिलेख माना जाएगा।
- बिना वैध दस्तावेजों के किसी भी दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी और आर्थिक दंड भी वसूला जाएगा।
अधिकारियों ने इस अभियान पर क्या कहा
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकारी जमीन राज्य की कीमती संपत्ति है और इस पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि गरीबों और असहाय लोगों के प्रति संवेदनशीलता बरती जाएगी। वहीं, प्रधान सचिव C.K. Anil ने निर्देश दिया है कि सरकारी जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और विधिसम्मत तरीके से कार्रवाई की जाए।
| तारीख |
घटनाक्रम/निर्देश |
| 1 अप्रैल, 2026 |
बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान की योजना |
| 16 अप्रैल, 2026 |
प्रधान सचिव ने DM को प्राथमिकता देने का पत्र भेजा |
| 18 अप्रैल, 2026 |
अवैध कब्जा हटाने का बड़ा आधिकारिक निर्णय |