Bihar के निजी स्कूलों पर सरकार की नजर, जुलाई 2026 में होगा 15 हजार से ज्यादा स्कूलों का निरीक्षण

Bihar: राज्य सरकार अब निजी स्कूलों की मनमानी रोकने और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही है। शिक्षा विभाग ने तय किया है कि जुलाई 2026 में राज्य के 15,668 से अधिक मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की बारीकी

Bihar: राज्य सरकार अब निजी स्कूलों की मनमानी रोकने और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही है। शिक्षा विभाग ने तय किया है कि जुलाई 2026 में राज्य के 15,668 से अधिक मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की बारीकी से जांच की जाएगी। इस अभियान का मुख्य मकसद यह देखना है कि स्कूल शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) और सरकार द्वारा तय मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

बिहार शिक्षा विभाग 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक यह विशेष जांच अभियान चलाएगा। इस दौरान स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की संख्या, उनकी योग्यता और दिए जा रहे वेतन की जांच होगी। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि स्कूलों में छात्रों से ली जाने वाली फीस नियमों के मुताबिक है या नहीं। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल के साथ-साथ प्रमंडलीय आयुक्त, DM, SDM और DEO जैसे वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहेंगे।

सरकार ने स्कूलों के लिए कुछ कड़े निर्देश जारी किए हैं। सभी निजी स्कूलों को 30 जून 2026 तक अपनी वेबसाइट पर शिक्षकों की जानकारी और फीस का पूरा विवरण अपडेट करना होगा। नियमों के मुताबिक, बिहार निजी विद्यालय शुल्क (विनियमन अधिनियम) 2019 के तहत स्कूल साल में अधिकतम 7% तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। अगर कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता है या जर्जर भवनों में कक्षाएं चलाता है, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है।

मुख्य बिंदु विवरण
निरीक्षण की तारीख 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026
कुल स्कूल 15,668 मान्यता प्राप्त विद्यालय
अधिकतम फीस वृद्धि प्रति वर्ष 7% तक
वेबसाइट अपडेट की समयसीमा 30 जून 2026 तक
जुर्माना 16 स्कूलों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगा
चिंता का विषय 37,000 से अधिक बिना मान्यता वाले स्कूल

वर्तमान में राज्य की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। जहाँ एक तरफ हजारों स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं, वहीं लगभग 1,000 स्कूलों के आवेदन अभी भी लंबित हैं। नीति आयोग की मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी स्कूलों के मुकाबले निजी स्कूलों का रुझान बढ़ा है, लेकिन कम फीस वाले स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। बिहार में माध्यमिक स्तर तक पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों की दर केवल 40% है, जिसे सुधारने के लिए यह कदम उठाए जा रहे हैं।