Bihar: बिहार सरकार राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। अब राज्य के सभी 343 पुलिस थानों को National Crime Records Bureau (NCRB) के ‘Case 1.0’ सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा।
Bihar: बिहार सरकार राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। अब राज्य के सभी 343 पुलिस थानों को National Crime Records Bureau (NCRB) के ‘Case 1.0’ सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा। इस डिजिटल बदलाव का मकसद पुलिस की कार्यप्रणाली को पेपरलेस बनाना और जांच की रफ्तार बढ़ाना है ताकि आम जनता को न्याय मिलने में आसानी हो।
Case 1.0 सॉफ्टवेयर से पुलिसिंग में क्या बदलेगा?
इस नए सॉफ्टवेयर के लागू होने से अब FIR, चार्जशीट और अपराधियों का पूरा इतिहास तुरंत ऑनलाइन दर्ज किया जा सकेगा। इससे बिहार पुलिस देश के किसी भी राज्य की पुलिस के साथ अपराधियों का डेटा सेकंडों में साझा कर पाएगी। इस सिस्टम से जांच में पारदर्शिता आएगी और पुलिस को पुराने रिकॉर्ड ढूंढने के लिए कागजों के ढेर नहीं पलटने पड़ेंगे।
पुलिसकर्मियों के लिए विशेष ट्रेनिंग और बजट
सॉफ्टवेयर को सही से चलाने के लिए 25 मई, 2026 को सुबह 10 बजे से विशेष प्रशिक्षण शुरू होगा। यह ट्रेनिंग NIC बिहार द्वारा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से दी जाएगी, जिसमें जिला NIC कार्यालय मुख्य केंद्र होंगे। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि पुलिस को मजबूत बनाने के लिए सरकार आधुनिकीकरण पर 200 करोड़ रुपये तक खर्च करने को तैयार है।
कौन कर रहा है इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी?
इस डिजिटल पहल को बिहार गृह विभाग और NIC बिहार के बीच आपसी तालमेल के बाद हरी झंडी मिली है। पुलिस मुख्यालय के आधुनिकीकरण और अपराध अभिलेख ब्यूरो ने सभी SP और SSP को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। CID के ADG पारसनाथ ने बताया कि अगले 5-6 महीनों में राज्य में अपराध अनुसंधान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी, जिसकी निगरानी खुद ADG CID कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Case 1.0 सॉफ्टवेयर से आम जनता को क्या फायदा होगा?
इस सिस्टम से पुलिस की जांच प्रक्रिया तेज होगी और पेपरलेस काम होने से पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे आम लोगों को न्याय मिलने में आसानी होगी।
बिहार पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए कितना बजट तय किया गया है?
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, पुलिस को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए सरकार जरूरत पड़ने पर 200 करोड़ रुपये तक खर्च करने को तैयार है।