Bihar : पटना के नगर पंचायत नौबतपुर और आसपास के कई इलाकों में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियमों को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। अब 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैग और सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वालों पर ग
Bihar : पटना के नगर पंचायत नौबतपुर और आसपास के कई इलाकों में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियमों को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। अब 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैग और सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वालों पर गाज गिरेगी। प्रशासन ने इस संबंध में नोटिस जारी कर दिए हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों से जुर्माना वसूला जाएगा।
किन चीजों पर है बैन और क्या है जुर्माना
बिहार में 1 जुलाई 2022 से ही सिंगल-यूज प्लास्टिक और थर्माकोल पर पूरी तरह रोक लगी है। इसमें प्लास्टिक के कप, प्लेट, ग्लास, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ और 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले कैरी बैग शामिल हैं। नियमों को तोड़ने पर अलग-अलग जुर्माने का प्रावधान है:
- आम जनता के लिए: ₹500 से ₹2,000 तक का जुर्माना।
- दुकानदार और निर्माता: उत्पादन, भंडारण और बिक्री करने वालों पर ₹20,000 से ₹1 लाख तक का जुर्माना या 5 साल की जेल हो सकती है।
- सामग्री: प्रतिबंधित प्लास्टिक सामान को मौके पर जब्त किया जा सकता है।
कचरा प्रबंधन के नए नियम और डस्टबिन का रंग
1 अप्रैल 2026 से पटना समेत बिहार के सभी शहरी निकायों में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026’ लागू हो गए हैं। अब हर नागरिक और संस्थान को कचरा चार अलग-अलग रंगों के डस्टबिन में डालना होगा। अगर कचरा अलग-अलग नहीं मिला, तो सफाईकर्मी उसे लेने से मना कर सकते हैं और जुर्माना भी लग सकता है।
| डस्टबिन का रंग |
किस तरह का कचरा |
| हरा |
गीला कचरा |
| नीला |
सूखा कचरा (प्लास्टिक, कागज, कांच) |
| लाल |
सैनिटरी कचरा |
| काला |
विशेष कचरा (बल्ब, पेंट, ई-वेस्ट) |
बड़े संस्थानों और अस्पतालों के लिए निर्देश
पटना नगर निगम ने नियम बनाया है कि जो संस्थान 100 किलो से ज्यादा कचरा निकालते हैं या जिनका क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर से ज्यादा है, उन्हें निगम में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। साथ ही उन्हें अपने परिसर में ही गीले कचरे का निपटारा करना होगा। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) को भी पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने की पहल शुरू की गई है।