Bihar : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से बिहार के छोटे और मध्यम उद्योगों पर भारी दबाव है। खासकर प्लास्टिक और बेकरी सेक्टर में लागत इतनी बढ़ गई है कि कई इकाइयां बंद होने की कगार पर हैं। मुजफ्फरपुर के ब
Bihar : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से बिहार के छोटे और मध्यम उद्योगों पर भारी दबाव है। खासकर प्लास्टिक और बेकरी सेक्टर में लागत इतनी बढ़ गई है कि कई इकाइयां बंद होने की कगार पर हैं। मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन आधा रह गया है और मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बेकरी और प्लास्टिक उद्योग पर क्या असर पड़ा है
कच्चे तेल की महंगाई ने सीधे तौर पर पैकेजिंग और कच्चे माल की कीमतों को बढ़ा दिया है। बेकरी सेक्टर में डालडा और मैदा के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। पैकेजिंग मटेरियल जो पहले 200 रुपये किलो मिलता था, अब 275 से 300 रुपये तक पहुंच गया है। प्लास्टिक उद्योग में भी पीवीसी पाइप के कच्चे माल की कीमत 82-83 रुपये से बढ़कर 130-140 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।
मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र की वर्तमान स्थिति
बेला औद्योगिक क्षेत्र की हालत काफी खराब है। यहाँ पहले 8 बेकरी इकाइयां चलती थीं, लेकिन अब सिर्फ 2 ही बची हैं। बेकरी का दैनिक उत्पादन 10 क्विंटल से घटकर 4-5 क्विंटल रह गया है। पीवीसी पाइप बनाने वाले चितरंजन प्रसाद ने बताया कि उनका उत्पादन एक टन से घटकर अब केवल 400-500 किलोग्राम रह गया है। मार्च 2026 में गैस की कमी और महंगाई के कारण करीब 200 फैक्ट्रियां बंद हुई थीं, जिससे 2,000 मजदूरों का रोजगार छिन गया।
लागत और मार्जिन का पूरा हिसाब
| सामग्री/क्षेत्र |
पुरानी कीमत/स्थिति |
नई कीमत/स्थिति |
| पैकेजिंग मटेरियल |
₹200 प्रति किलो |
₹275-300 प्रति किलो |
| पीवीसी पाइप कच्चा माल |
₹82-83 प्रति किलो |
₹130-140 प्रति किलो |
| बेकरी उत्पादन (दैनिक) |
10 क्विंटल |
4-5 क्विंटल |
| बेला बेकरी इकाइयां |
8 इकाइयां |
2 इकाइयां |
उद्यमी अब बिजली बिल, बैंक लोन की किस्त और कर्मचारियों की सैलरी देने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतें 5 से 10% और बढ़ती हैं, तो वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में प्लास्टिक पैकेजिंग कंपनियों के मुनाफे में 3 से 5% की गिरावट आ सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार के बेला औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियां क्यों बंद हो रही हैं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पैकेजिंग, डालडा और पीवीसी जैसे कच्चे माल की लागत दोगुनी हो गई है। साथ ही व्यावसायिक गैस की कमी के कारण उत्पादन घटा है, जिससे फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं।
प्लास्टिक और बेकरी उत्पादों की कीमतें क्यों नहीं बढ़ाई जा रही हैं?
लागत बढ़ने के बावजूद बाजार में मांग कमजोर है, इसलिए उद्यमी उत्पादों की कीमतें नहीं बढ़ा पा रहे हैं, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन खत्म हो रहा है।