Bihar की पिडिया पेंटिंग को मिला GI टैग, रोहतास की विनीता कुमारी ने अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाई कला

Bihar: बिहार की पारंपरिक पिडिया-लेखन लोककला को जून 2026 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग दिया गया है. यह उपलब्धि बिहार की कला और संस्कृति के लिए बहुत बड़ी बात है. इस कला को पहचान दिलाने में रोहतास की कलाकार विनीता कुमारी का ब

Bihar: बिहार की पारंपरिक पिडिया-लेखन लोककला को जून 2026 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग दिया गया है. यह उपलब्धि बिहार की कला और संस्कृति के लिए बहुत बड़ी बात है. इस कला को पहचान दिलाने में रोहतास की कलाकार विनीता कुमारी का बड़ा योगदान रहा है, जिन्होंने गांवों की दीवारों पर बनी इस कला को कैनवास और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया.

पिडिया पेंटिंग के साथ-साथ नालंदा की बावन बूटी साड़ी और गया की पत्थरकट्टी कला को भी जीआई टैग मिला है. जीआई टैग मिलने से अब इस कला को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और केवल अधिकृत लोग ही इस नाम का इस्तेमाल कर पाएंगे. यह पूरी प्रक्रिया वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा संचालित की गई है. एक बार पंजीकरण होने के बाद यह सुरक्षा 10 साल तक रहती है, जिसे बाद में बढ़ाया जा सकता है.

इस सफलता के पीछे बिहार सरकार और नाबार्ड (NABARD) के संयुक्त प्रयास रहे हैं. आरा की सांस्कृतिक संस्था सृजना न्यास ने भी जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मौके पर सभी कलाकारों और बुनकरों को बधाई दी है. नाबार्ड के अधिकारियों का कहना है कि इससे स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

विनीता कुमारी को इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा उनके स्वर्गीय पति भुवनेश्वर भास्कर से मिली थी. अब इस टैग की वजह से भोजपुरी संस्कृति और विरासत को दुनिया भर में नई पहचान मिलेगी और स्थानीय कलाकारों को वैश्विक स्तर पर काम करने का मौका मिलेगा.