Bihar में PhD के नियम बदले, अब 3 राज्यों के एक्सपर्ट जांचेंगे थीसिस; बिना मास्टर डिग्री के भी मिल सकेगा प्रवेश
Bihar: राज्य के विश्वविद्यालयों में पीएचडी (PhD) करने वाले छात्रों के लिए अब नियम पूरी तरह बदल गए हैं। बिहार सरकार ने ‘बिहार स्टेट यूनिवर्सिटीज पीएचडी ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशंस, 2026’ लागू कर दिया है, जो 4 जुला
Bihar: राज्य के विश्वविद्यालयों में पीएचडी (PhD) करने वाले छात्रों के लिए अब नियम पूरी तरह बदल गए हैं। बिहार सरकार ने ‘बिहार स्टेट यूनिवर्सिटीज पीएचडी ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशंस, 2026’ लागू कर दिया है, जो 4 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया है। इस नई नियमावली का मकसद रिसर्च की क्वालिटी बढ़ाना और इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के हिसाब से बनाना है।
अब पीएचडी थीसिस का मूल्यांकन शोध निर्देशक के साथ दो बाहरी परीक्षकों द्वारा किया जाएगा। इसमें बाहरी राज्यों के विशेषज्ञों और विदेशी परीक्षकों को भी शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी करें। अगर जरूरत पड़ी तो मौखिक परीक्षा यानी वाइवा-वोसे ऑनलाइन तरीके से भी लिया जा सकेगा।
प्रवेश प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब चार साल के स्नातक (ऑनर्स विथ रिसर्च) कोर्स में 7.5 CGPA या उससे ज्यादा अंक लाने वाले छात्र बिना मास्टर डिग्री के सीधे पीएचडी में एडमिशन ले सकेंगे। इसके अलावा, प्रवेश के लिए यूजीसी-नेट, यूजीसी-सीएसआईआर-नेट या गेट (GATE) पास करना अनिवार्य होगा। सिलेक्शन में नेट/गेट के नंबरों को 80% और इंटरव्यू को 20% वेटेज दिया जाएगा।
शोधार्थियों के लिए कुछ कड़े नियम भी तय किए गए हैं। थीसिस जमा करने से पहले एक रिसर्च पेपर पब्लिश करना और किसी नेशनल या इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में अपना काम दिखाना जरूरी होगा। साथ ही, अगर थीसिस में 10% से ज्यादा साहित्यिक चोरी (Plagiarism) पाई गई, तो उसे सुधार के लिए वापस भेज दिया जाएगा।
| विषय | नया नियम |
|---|---|
| पीएचडी अवधि | न्यूनतम 3 वर्ष, अधिकतम 6 वर्ष (विशेष छूट के साथ 2 साल अतिरिक्त) |
| टीचिंग वर्क | हफ्ते में 4 से 6 घंटे ट्यूटोरियल या लैब कार्य करना होगा |
| गाइड की पात्रता | रिटायरमेंट में 3 साल से कम समय बचे शिक्षकों को नए छात्र नहीं मिलेंगे |
| विशेष छूट | महिला और 40% से अधिक दिव्यांग शोधार्थियों को 2 साल की अतिरिक्त छूट |
यह नया अध्यादेश अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है और इसे राज्यपाल-सह-कुलाधिपति की मंजूरी के बाद जारी किया गया है। यह नियम बिहार के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में समान रूप से लागू होंगे।