Bihar में पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर किसानों की मांग, मंत्री नीतीश मिश्रा से मिले प्रतिनिधिमंडल
Bihar: नौबतपुर और आसपास के इलाकों में प्रस्तावित पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप विकास योजना को लेकर किसानों में हलचल तेज है। अपनी समस्याओं को लेकर किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्
Bihar: नौबतपुर और आसपास के इलाकों में प्रस्तावित पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप विकास योजना को लेकर किसानों में हलचल तेज है। अपनी समस्याओं को लेकर किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा से मुलाकात की। किसानों ने मुख्य रूप से अपनी जमीन के सही मूल्यांकन और उचित मुआवजे की मांग रखी है।
इस प्रोजेक्ट के तहत नौबतपुर समेत 9 ब्लॉकों के 274 राजस्व गांवों और पुनपुन नगर पंचायत के 6 वार्डों की लगभग 81,000 एकड़ जमीन शामिल है। सरकार ने इस योजना के लिए ‘बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026’ को मंजूरी दे दी है। इस नई नीति के तहत बिहार हाउसिंग बोर्ड अब उन जमीन मालिकों से सीधे जमीन खरीद सकेगा जिन्हें इलाज, बच्चों की पढ़ाई या शादी जैसे जरूरी कामों के लिए तुरंत पैसों की जरूरत है।
मुआवजे को लेकर सरकार ने कुछ नियम तय किए हैं, जिन्हें समझना आम किसानों के लिए जरूरी है:
| जमीन का प्रकार | मुआवजा राशि | अतिरिक्त लाभ |
|---|---|---|
| ग्रामीण जमीन | मार्केट वैल्यू या MVR का 4 गुना (जो भी ज्यादा हो) | 10% इंसेंटिव |
| शहरी जमीन | मार्केट वैल्यू या MVR का 2 गुना | – |
| विकसित प्लॉट | – | लगभग 55% विकसित प्लॉट वापस मिलेगा |
हालांकि, सरकार ने जमीन माफियाओं पर लगाम लगाने और प्लानिंग को सही रखने के लिए चिन्हित गांवों में 31 मार्च 2027 तक जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। केवल केंद्र और राज्य सरकार के प्रोजेक्ट्स या SIPB द्वारा मंजूर औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को ही इससे छूट मिली है।
दूसरी तरफ, पुनपुन और नौबतपुर के किसान इस योजना का विरोध भी कर रहे हैं। 19 जून 2026 को किसानों ने मोटरसाइकिल रैली निकालकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि सरकार उनकी उपजाऊ जमीन ले रही है और दिया जा रहा मुआवजा कम है। किसानों की मांग है कि उन्हें मार्केट वैल्यू से चार गुना से भी ज्यादा पैसा मिले।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरोसा दिलाया है कि जमीन मालिकों को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने 19 मई 2026 को सभी पंचायतों में ‘सहयोग शिविर’ शुरू किए हैं ताकि जमीन अधिग्रहण से जुड़ी शिकायतों का निपटारा किया जा सके। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 30 दिनों के भीतर इन समस्याओं को हल करें, वरना उन पर निलंबन की कार्रवाई होगी।