Bihar: बिहार सरकार ने लंबे समय से हड़ताल पर बैठे पंचायत सचिवों को बिना शर्त काम पर लौटने के लिए कहा है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि काम पर लौटने के बाद उनकी मांगों पर सकारात्मक तरीके से विचार किया जाएगा। पंचायती राज विभा
Bihar: बिहार सरकार ने लंबे समय से हड़ताल पर बैठे पंचायत सचिवों को बिना शर्त काम पर लौटने के लिए कहा है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि काम पर लौटने के बाद उनकी मांगों पर सकारात्मक तरीके से विचार किया जाएगा। पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने साफ किया है कि इस हड़ताल की वजह से आम जनता के जरूरी सरकारी काम रुक रहे हैं।
पंचायत सचिवों के काम पर लौटने की शर्तें और चेतावनी क्या है?
सरकार ने 13 मई 2026 को स्पष्ट किया कि यदि पंचायत सचिव बिना किसी शर्त के अपनी हड़ताल खत्म कर काम शुरू करते हैं, तो उनकी मांगों पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, सरकार ने कड़ी चेतावनी भी दी है कि अगर कर्मचारी काम पर नहीं लौटे, तो ‘नो वर्क नो पे’ नियम लागू होगा, जिससे उनका वेतन रोक दिया जाएगा।
जनता के किन कामों पर पड़ रहा है असर और क्या है वैकल्पिक प्लान?
पंचायत सचिवों की हड़ताल 8 अप्रैल 2026 से चल रही है। इस वजह से गांवों में राशन कार्ड बनवाने, जरूरी प्रमाण पत्र जारी करने और स्थानीय विकास कार्यों जैसे महत्वपूर्ण काम अटक गए हैं। पंचायती राज सचिव मनोज कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे वैकल्पिक व्यवस्था करें ताकि आम लोगों को अपने कामों के लिए परेशान न होना पड़े।
पंचायत सचिवों की मुख्य मांगें क्या हैं?
- 2005 बैच के सचिवों के लिए एकमुश्त जिला स्थानांतरण आदेश जारी करना।
- शैक्षणिक योग्यता स्नातक कर 4200 ग्रेड पे लागू करना।
- पदनाम बदलकर ‘ग्राम पंचायत राज पदाधिकारी’ करना।
- न्यूनतम 2000 रुपये परिवहन भत्ता देना।
- BPRO पद पर प्रमोशन के लिए 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा को हटाना।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पंचायत सचिव कब से हड़ताल पर हैं और उनकी मुख्य समस्या क्या है?
पंचायत सचिव 8 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उनकी मुख्य मांगें ग्रेड पे बढ़ाने, पदनाम बदलने और स्थानांतरण नियमों में सुधार से जुड़ी हैं।
अगर पंचायत सचिव काम पर नहीं लौटते हैं तो क्या होगा?
सरकार ने चेतावनी दी है कि काम पर न लौटने वालों के लिए ‘नो वर्क नो पे’ का नियम लागू होगा, जिसका मतलब है कि उनका वेतन काट लिया जाएगा।