Bihar: राज्य की पंचायतों में महिलाओं और बच्चों को कुपोषण, एनीमिया और कैल्शियम की कमी से बचाने के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है। अब गांवों में पोषण उद्यान बनाए जा रहे हैं और स्तनपान को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि सम
Bihar: राज्य की पंचायतों में महिलाओं और बच्चों को कुपोषण, एनीमिया और कैल्शियम की कमी से बचाने के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है। अब गांवों में पोषण उद्यान बनाए जा रहे हैं और स्तनपान को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि समुदायों को सेहतमंद बनाया जा सके। सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को हर घर तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।
पंचायतों में पोषण वाटिका और ‘डिब्बे का दूध मुक्त’ अभियान क्या है?
नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड की तेलमर पंचायत में मुखिया विद्यानंद बिंद ने ग्रामीणों को अपने घरों के पास पोषण वाटिकाएं बनाने के लिए प्रेरित किया और बीज भी बांटे। इससे महिलाओं और बच्चों में एनीमिया की समस्या कम हुई है। वहीं, नवादा के वारिसलीगंज प्रखंड की मोहद्दीनपुर पंचायत को मुखिया प्रभु प्रसाद ‘डिब्बे का दूध मुक्त’ बनाने की तैयारी में हैं। यहाँ आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए माताओं को संतुलित आहार और जन्म के बाद छह महीने तक केवल माँ का दूध पिलाने के फायदे बताए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में क्या नए बदलाव किए गए हैं?
बिहार सरकार अब सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 328 स्तनपान कॉर्नर बना रही है ताकि माताओं को सुरक्षित और साफ जगह मिल सके। मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए ‘होम डिलीवरी मुक्त पंचायत’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उन गांवों पर ध्यान दिया जा रहा है जहाँ 40% से ज्यादा प्रसव घरों में होते हैं। इसके अलावा, अब सिर्फ गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) ही नहीं, बल्कि मध्यम कुपोषित (MAM) बच्चों को भी पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRCs) में भर्ती किया जाएगा।
पोषण पखवाड़ा और अन्य सरकारी योजनाएं
अप्रैल 2026 में राज्यव्यापी 8वां पोषण पखवाड़ा मनाया गया, जिसमें बच्चों के मस्तिष्क विकास पर जोर दिया गया। शहरी इलाकों में पोषण और कमाई बढ़ाने के लिए सरकार छत पर बागवानी (Rooftop Gardening) के लिए 75% अनुदान दे रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए उनके मानदेय में 2,000 रुपये की वृद्धि की गई, जिससे अब उनका मासिक मानदेय 9,000 रुपये हो गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार में बच्चों के कुपोषण की वर्तमान स्थिति क्या है?
दिसंबर 2025 के डेटा के अनुसार, राज्य में 5 साल से कम उम्र के लगभग 41% बच्चे कम वजन के हैं, 38% बच्चे स्टंटेड (कम कद) और 23% बच्चे वेस्टिंग की श्रेणी में आते हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRCs) में अब किन बच्चों को भर्ती किया जाएगा?
दिसंबर 2025 के फैसले के बाद अब गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों के साथ-साथ मध्यम कुपोषित (MAM) बच्चों को भी NRCs में भर्ती कर चिकित्सकीय निगरानी दी जाएगी।