Bihar में ऑनलाइन बेटिंग और जुए पर लगा बैन, पहली बार पकड़े जाने पर 3 साल की जेल और 5 लाख तक जुर्माना

Bihar: बिहार विधानसभा ने राज्य में ऑनलाइन और ऑफलाइन जुए को पूरी तरह बंद करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को सदन में बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस नए कानू

Bihar: बिहार विधानसभा ने राज्य में ऑनलाइन और ऑफलाइन जुए को पूरी तरह बंद करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को सदन में बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस नए कानून के बाद अब राज्य में मोबाइल ऐप, कंप्यूटर या किसी भी डिजिटल माध्यम से सट्टा लगाना या जुआ खेलना अपराध माना जाएगा।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन में यह बिल पेश किया। उन्होंने बताया कि इस कानून का मकसद जुए के पूरे नेटवर्क को खत्म करना है। अब केवल जुआ खेलने वाले ही नहीं, बल्कि इसे चलाने वाले, पैसा देने वाले और कमीशन खाने वाले लोग भी कानून के दायरे में आएंगे। पुलिस को यह अधिकार दिया गया है कि अगर किसी सार्वजनिक जगह पर जुए की खबर मिलती है, तो वह बिना वारंट के तलाशी ले सकती है और गिरफ्तारी कर सकती है।

नए नियमों के मुताबिक, ऑनलाइन जुए से जुड़े बैंक खातों और रकम को सीज किया जा सकेगा। अगर किसी के मोबाइल या कंप्यूटर में सट्टेबाजी वाला ऐप मिलता है, तो उसे सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा, जुए का विज्ञापन करना या उसका प्रचार करना भी अब गैरकानूनी होगा।

अपराध सजा (पहली बार) जुर्माना (पहली बार) दोबारा पकड़े जाने पर सजा/जुर्माना
ऑनलाइन/ऑफलाइन जुआ खेलना 1 से 3 साल जेल ₹50,000 से ₹5 लाख 7 साल जेल और ₹1 लाख से ₹10 लाख जुर्माना
बैंक खाता/डिजिटल वॉलेट देना 6 महीने जेल ₹10,000 तक –
जुए का विज्ञापन करना 3 साल जेल ₹50,000 तक –
जुए की सामग्री प्रकाशित करना 5 साल जेल ₹5 लाख तक –

सरकार ने कई खास खेलों और ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया है, जिनमें बिग बैकारा, सिक्स-व्हील, व्हील ऑफ फॉर्च्यून, रूलेट, स्लॉट्स और थ्री-कार्ड गेम जैसे भाग्य आधारित खेल शामिल हैं। यह नया कानून 1867 के पुराने सार्वजनिक जुआ अधिनियम की जगह लेगा, ताकि बदलते समय और डिजिटल सट्टेबाजी से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।