Bihar: बिहार सरकार ने राज्य में शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए एक बड़ी योजना को हरी झंडी दे दी है. इसके तहत राज्य के विभिन्न हिस्सों में 11 नई सैटेलाइट टाउनशिप बसाई जाएंगी. इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरका
Bihar: बिहार सरकार ने राज्य में शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए एक बड़ी योजना को हरी झंडी दे दी है. इसके तहत राज्य के विभिन्न हिस्सों में 11 नई सैटेलाइट टाउनशिप बसाई जाएंगी. इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार किसानों की जमीन का अधिग्रहण करने के बजाय उन्हें इस प्रोजेक्ट में पार्टनर बना रही है. लैंड पूलिंग मॉडल पर आधारित इस स्कीम से किसानों की जमीन की कीमत आने वाले समय में 10 से 20 गुना तक बढ़ने की उम्मीद है.
किसानों को क्या फायदा होगा और जमीन का बंटवारा कैसे होगा?
बिहार शहरी आयोजना स्कीम नियमावली 2025 के तहत किसानों को उनकी कुल जमीन का 55 फीसदी हिस्सा विकसित प्लॉट के रूप में वापस दिया जाएगा. इस जमीन पर सरकार सड़क, बिजली, जल निकासी और सीवरेज जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं खुद तैयार करके देगी. जो किसान इस योजना में शामिल नहीं होना चाहते हैं, सरकार उनकी जमीन बाजार दर से चार गुना अधिक दाम पर खरीदेगी. इसके अलावा जमीन मालिकों के पास हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) लेने का विकल्प भी मौजूद रहेगा.
किन जिलों में रजिस्ट्री पर रोक लगी है और कब तक रहेगी?
योजना के सुचारू क्रियान्वयन और बिचौलियों को रोकने के लिए सरकार ने 11 जिलों में जमीन की रजिस्ट्री पर अस्थाई रोक लगा दी है. पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में जमीन की खरीद-बिक्री पर 31 मार्च 2027 तक रोक रहेगी. वहीं मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी में यह पाबंदी 30 जून 2027 तक प्रभावी होगी. यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि प्रॉपर्टी डीलर किसानों से कम दामों पर जमीन न हड़प सकें.
टाउनशिप में जमीन के उपयोग का पूरा ब्यौरा
टाउनशिप को पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से बसाने के लिए जमीन का बंटवारा तय कर दिया गया है. इसकी जानकारी नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती है:
| जमीन का उपयोग |
हिस्सा (प्रतिशत में) |
| विकसित भूखंड (किसानों को वापस मिलेगा) |
55% |
| सड़क नेटवर्क |
22% |
| सार्वजनिक सुविधाएं (पार्क, स्कूल, अस्पताल) |
5% |
| आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आवास |
3% |
| सरकार का हिस्सा (लागत वसूली के लिए) |
15% |
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने बताया कि अक्टूबर-नवंबर 2026 तक सभी भूमि अभिलेख जारी कर दिए जाएंगे. इसके बाद भू-मालिकों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए एक महीने का समय मिलेगा. जमीन विवादों के जल्द निपटारे के लिए एक विशेष ट्रिब्यूनल का गठन भी किया जा रहा है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या सभी किसानों के लिए जमीन देना अनिवार्य है?
नहीं, किसान लैंड पूलिंग में शामिल होने या बाजार दर से चार गुना मुआवजा लेकर जमीन बेचने में से किसी एक विकल्प को चुन सकते हैं.
बफर जोन क्या है और वहां क्या पाबंदियां होंगी?
टाउनशिप के मुख्य और विशेष क्षेत्र को मिलाकर बफर जोन बनाया गया है, जहां किसी भी प्रकार के निर्माण और जमीन की रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक रहेगी.