Bihar में PhD गाइड बनने के नियम बदले, अब 5 रिसर्च आर्टिकल होने पर ही मिलेगी अनुमति

Bihar: बिहार के विश्वविद्यालयों में अब PhD गाइड बनना पहले के मुकाबले कठिन हो गया है। यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लागू करते हुए राज्य में ‘बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी पीएचडी ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशन-2026’ लाया गया

Bihar: बिहार के विश्वविद्यालयों में अब PhD गाइड बनना पहले के मुकाबले कठिन हो गया है। यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लागू करते हुए राज्य में ‘बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी पीएचडी ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशन-2026’ लाया गया है। अब असिस्टेंट प्रोफेसर को गाइड बनने के लिए कम से कम पांच रिसर्च आर्टिकल प्रकाशित कराने होंगे, जबकि पहले यह संख्या केवल दो थी।

इन नए नियमों का असर सीधे तौर पर प्रोफेसरों और शोधार्थियों पर पड़ेगा। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसरों के लिए भी पीएचडी पूरी करने के बाद कम से कम पांच रिसर्च पेपर का होना जरूरी है। इसके अलावा, जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट में तीन साल से कम का समय बचा है, उन्हें नए शोध छात्रों को गाइड करने की अनुमति नहीं होगी, हालांकि वे अपने पुराने छात्रों का मार्गदर्शन जारी रख सकते हैं।

गाइड्स के लिए छात्रों की संख्या भी तय कर दी गई है। एक प्रोफेसर अधिकतम 8, एसोसिएट प्रोफेसर 6 और असिस्टेंट प्रोफेसर केवल 4 छात्रों को गाइड कर सकेंगे। तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी (TMBU) ने इन नियमों को मंजूरी दे दी है, जबकि बी.आर. अंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी (BRABU) में पीजी कॉलेजों के शिक्षकों की पात्रता को लेकर चर्चा हुई है।

शोधार्थियों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। अब एडमिशन में UGC-NET, CSIR NET या GATE स्कोर को 80% वेटेज दिया जाएगा और इंटरव्यू का भार 20% होगा। JRF क्वालिफाइड उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलेगी। साथ ही, छात्रों को 12 क्रेडिट का कोर्स पूरा करना होगा और थीसिस जमा करने से पहले एक रिसर्च पेपर पब्लिश करना और कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेना अनिवार्य होगा।

पद अधिकतम छात्र (PhD Scholars)
प्रोफेसर 8
एसोसिएट प्रोफेसर 6
असिस्टेंट प्रोफेसर 4

AI के गलत इस्तेमाल और साहित्यिक चोरी (Plagiarism) को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं। अब शोध कार्य में गड़बड़ी मिलने पर रजिस्ट्रेशन रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। छात्रों को अपने सुपरवाइजर की देखरेख में रोजाना कम से कम चार घंटे रिसर्च करना होगा, जिसकी हाजिरी भी दर्ज की जाएगी।