Bihar: बिहार के मखाना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन कर दिया है, जिससे अब मखाना की खेती, उसकी क्वालिटी और बाजार तक पहुंच आसान होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 सितंबर 202
Bihar: बिहार के मखाना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन कर दिया है, जिससे अब मखाना की खेती, उसकी क्वालिटी और बाजार तक पहुंच आसान होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 सितंबर 2025 को पूर्णिया में इस बोर्ड की शुरुआत की। सरकार ने इसके लिए 476.03 करोड़ रुपये की ‘केंद्रीय मखाना विकास योजना’ को मंजूरी दी है, जिसका सीधा फायदा बिहार के 21 जिलों के किसानों को मिलेगा।
मखाना बोर्ड से किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
इस योजना के तहत मखाना उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। किसानों को मखाना बोर्ड के जरिए प्रति हेक्टेयर 52,800 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि मखाना की कटाई, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग में सुधार हो ताकि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल सके। इस योजना में महिला किसानों की भागीदारी पर भी जोर दिया गया है, जिसमें 30% कोटा सुनिश्चित करने का प्रयास है।
योजना की मुख्य बातें और नियम क्या हैं?
केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक के लिए इस योजना का खाका तैयार किया है। इसके तहत किसानों को मिलने वाली मदद की सीमा तय की गई है।
| विवरण |
जानकारी |
| कुल बजट |
476.03 करोड़ रुपये |
| लाभार्थी जिले |
बिहार के 21 जिले |
| न्यूनतम लाभ क्षेत्र |
0.1 हेक्टेयर (0.25 एकड़) |
| अधिकतम लाभ क्षेत्र |
2 हेक्टेयर (5 एकड़) |
| प्रति हेक्टेयर अनुदान |
52,800 रुपये |
| महिला भागीदारी लक्ष्य |
30% |
मखाना उत्पादन और बाजार की मौजूदा स्थिति क्या है?
बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन में 85-90% का योगदान देता है। मिथिला मखाना को 2022 में GI टैग मिला था, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ी है। 21 जनवरी 2026 को पहली खेप पूर्णिया से समुद्री रास्ते दुबई भेजी गई। दरभंगा में बोर्ड का कार्यालय शुरू हो चुका है और अब नई तकनीक से केवल डेढ़ फीट पानी में भी खेती संभव है। हालांकि, सहरसा के कुछ किसानों ने मखाना गुड़िया के उचित दाम न मिलने और प्रोसेसिंग यूनिट की कमी की शिकायत भी की है।