Bihar: मुजफ्फरपुर में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी को अपना शिकार बनाया और उनसे 67 लाख रुपये लूट लिए। ठगों ने पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 10 से 13 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए बंधक बनाए रखा।
Bihar: मुजफ्फरपुर में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी को अपना शिकार बनाया और उनसे 67 लाख रुपये लूट लिए। ठगों ने पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 10 से 13 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए बंधक बनाए रखा। इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पटना से एक बाप और बेटे को गिरफ्तार किया है।
कैसे हुआ यह पूरा फर्जीवाड़ा?
मुजफ्फरपुर के अमगोला निवासी 66 वर्षीय महेश गमी को 26 मार्च को एक अनजान नंबर से WhatsApp वीडियो कॉल आया। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और दावा किया कि उनका Aadhaar कार्ड पहलगाम में आतंकी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। ठगों ने उन्हें डराया कि उनके खिलाफ 5 करोड़ रुपये का केस दर्ज है। डर के मारे पीड़ित ने अपनी छोटी बेटी की शादी के लिए बचाए हुए 67 लाख रुपये अलग-अलग किस्तों में ट्रांसफर कर दिए।
ठगों ने किन तरीकों का इस्तेमाल किया?
साइबर अपराधियों ने पीड़ित पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए Supreme Court, RBI, CBI और Enforcement Directorate के फर्जी दस्तावेज दिखाए। उन्हें आदेश दिया गया कि वे कॉल न काटें और किसी को इस बारे में न बताएं, वरना उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पीड़ित को तब शक हुआ जब ठगों ने उनसे उनकी LIC पॉलिसी सरेंडर करने को कहा। इसके बाद एक LIC एजेंट की सलाह पर उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और 10 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई।
बिहार में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट के मामले
मुजफ्फरपुर साइबर DSP हिमांशु कुमार ने बताया कि अपराधी लोगों को ड्रग तस्करी या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाकर वीडियो सर्विलांस के जरिए डराते हैं। हाल के दिनों में बिहार के मोतिहारी और भोजपुर में भी ऐसे ही बड़े रैकेट पकड़े गए हैं। पुलिस ने साफ किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती है। लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसे किसी भी कॉल पर भरोसा न करें और तुरंत अधिकारियों को सूचित करें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
यह एक साइबर फ्रॉड है जिसमें ठग पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं और पीड़ित को डराकर घर में ही कैद रहने को कहते हैं ताकि वे उनसे पैसे वसूल सकें।
अगर ऐसा कॉल आए तो क्या करना चाहिए?
तुरंत कॉल काट दें, किसी को पैसे न भेजें और नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं।