Bihar: मुंगेर और भागलपुर के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब इन दोनों शहरों के बीच पटना की तर्ज पर एक शानदार ‘मरीन ड्राइव’ बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा की है और अधिकारिय
Bihar: मुंगेर और भागलपुर के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब इन दोनों शहरों के बीच पटना की तर्ज पर एक शानदार ‘मरीन ड्राइव’ बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा की है और अधिकारियों को काम में तेजी लाने का निर्देश दिया है। यह रास्ता न सिर्फ सफर को आसान बनाएगा, बल्कि इलाके के विकास में भी बड़ा योगदान देगा।
क्या है इस प्रोजेक्ट की खासियत और लागत
यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 83 किलोमीटर लंबा होगा, जिसे दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा मुंगेर के सफियाबाद से सुल्तानगंज तक 42 किलोमीटर का होगा और दूसरा सुल्तानगंज से सबौर तक करीब 41 किलोमीटर का होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 9,970 करोड़ रुपये है। इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पर बनाया जाएगा, जिसमें 40 प्रतिशत पैसा सरकार देगी और 60 प्रतिशत निजी कंपनी लगाएगी।
आम लोगों को क्या फायदे मिलेंगे
इस मरीन ड्राइव के बनने से मुंगेर और भागलपुर के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि इसे जमीन के स्तर पर (At-grade) ज्यादा रखा जाए ताकि शहर की अन्य सड़कों से इसकी कनेक्टिविटी अच्छी रहे। साथ ही, यह रास्ता शहर के लिए एक ‘सुरक्षा बांध’ का काम भी करेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें 5 टोल प्लाजा, बस बे, ट्रक ले-बाय और अगुवानी घाट के पास एक बड़ा विश्राम क्षेत्र बनाया जाएगा।
विकास के अन्य बड़े प्लान
सड़क के अलावा सरकार मुंगेर से बरियारपुर के बीच नया शहर बसाने और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की तैयारी में है। मुंगेर एयरपोर्ट को भी अपग्रेड किया जाएगा ताकि रात में भी विमान लैंड कर सकें। इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 699 एकड़ जमीन ली जाएगी और सुल्तानगंज से सबौर के बीच 34 घाटों का आधुनिकीकरण भी किया जाएगा। सरकार ने इस पूरे काम को 4 साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ की कुल लंबाई और लागत कितनी है
इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 83 किलोमीटर है और इसकी कुल अनुमानित लागत करीब 9,970 करोड़ रुपये है।
इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में कितना समय लगेगा
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 4 साल का लक्ष्य रखा गया है।