Bihar: मुंगेर और भागलपुर के बीच अब सफर करना बहुत आसान हो जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस रूट पर मरीन ड्राइव बनाने का आदेश दे दिया है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ यात्रा का समय कम करेगा, बल्कि शहर को बाढ़ से बचाने के लिए स
Bihar: मुंगेर और भागलपुर के बीच अब सफर करना बहुत आसान हो जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस रूट पर मरीन ड्राइव बनाने का आदेश दे दिया है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ यात्रा का समय कम करेगा, बल्कि शहर को बाढ़ से बचाने के लिए सुरक्षा बांध का काम भी करेगा। बबुआ घाट पर हुई समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है।
मरीन ड्राइव प्रोजेक्ट की मुख्य बातें क्या हैं?
इस पूरी परियोजना की कुल लंबाई 83 किलोमीटर से ज्यादा होगी। इसे दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा मुंगेर से सुल्तानगंज तक 42 किलोमीटर लंबा होगा और दूसरा सुल्तानगंज से सबौर तक 41.33 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें जमीन पर चलने वाली सड़क और ऊंचाई पर बने एलिवेटेड कॉरिडोर दोनों शामिल होंगे। सरकार का लक्ष्य मुंगेर-सुल्तानगंज वाले हिस्से को चार साल में पूरा करने का है।
लागत और जमीन का क्या हिसाब है?
मुंगेर-सुल्तानगंज खंड को बनाने में करीब 5327 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) अपनाया गया है, जिसमें 40% पैसा सरकार लगाएगी और 60% निवेश निजी डेवलपर करेंगे। इसके लिए कुल 699.06 एकड़ जमीन की जरूरत है, जो 43 गांवों के 2,100 से ज्यादा भूखंडों में फैली है।
आम लोगों को इससे क्या फायदा होगा?
इस सड़क के बनने से मुंगेर और भागलपुर के बीच यात्रा का समय और खर्चा काफी कम हो जाएगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान होगा। प्रोजेक्ट में 5 टोल प्लाजा, बस बे, ट्रक ले-बाय और अगुवानी घाट के पास एक बड़ा विश्राम क्षेत्र बनाया जाएगा। साथ ही सुल्तानगंज-सबौर खंड के पास 34 घाटों का विकास किया जाएगा जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और सुविधा मिलेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंगेर-भागलपुर मरीन ड्राइव की कुल लंबाई कितनी होगी?
इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 83 किलोमीटर से अधिक होगी, जिसमें मुंगेर-सुल्तानगंज (42 किमी) और सुल्तानगंज-सबौर (41.33 किमी) के दो खंड शामिल हैं।
इस प्रोजेक्ट में सरकार और निजी कंपनी का कितना निवेश है?
यह प्रोजेक्ट HAM मॉडल पर आधारित है, जिसमें सरकार 40% और निजी डेवलपर 60% निवेश करेंगे। निजी ठेकेदार 15 साल तक रखरखाव देखेंगे, लेकिन टोल वसूली सरकार करेगी।