Bihar: मोतिहारी में जाली नोटों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार में शामिल मुख्य सरगना सुशील तिवारी उर्फ दया तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। रविवार, 24 मई 2026 को आर्मी इंटेलिजेंस (लखनऊ) और बिहार एसटीएफ की संयुक्त टीम ने उसे द
Bihar: मोतिहारी में जाली नोटों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार में शामिल मुख्य सरगना सुशील तिवारी उर्फ दया तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। रविवार, 24 मई 2026 को आर्मी इंटेलिजेंस (लखनऊ) और बिहार एसटीएफ की संयुक्त टीम ने उसे दबोचा। यह गिरोह भारत, नेपाल और बांग्लादेश तक फैला हुआ था और लंबे समय से सीमा पार से जाली करेंसी का खेल चला रहा था।
दया तिवारी की गिरफ्तारी कैसे हुई और कौन था शामिल
सुरक्षा एजेंसियों को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी सुशील तिवारी भारत-नेपाल सीमा के पास छिपा हुआ है। इस जानकारी के बाद आर्मी इंटेलिजेंस, बिहार एसटीएफ और हरैया थाना पुलिस ने मिलकर छापेमारी की और उसे गिरफ्तार कर लिया। वह पिछले पांच से छह महीने से फरार चल रहा था। मोतिहारी के एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी ताकि इस नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों का पता लगाया जा सके।
इस गिरोह का खुलासा कब हुआ और क्या मिला
इस बड़े नेटवर्क का पहला खुलासा 31 जनवरी 2026 को हुआ था। उस समय मोतिहारी के हरैया थाना पुलिस ने एक नेपाली नागरिक समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन मुख्य सरगना सुशील तिवारी फरार हो गया था। उस छापेमारी के दौरान पुलिस ने निम्नलिखित सामान बरामद किया था:
- लगभग 25 लाख रुपये की नेपाली जाली मुद्रा
- 18,500 रुपये की भारतीय जाली करेंसी
- एक दर्जन मोबाइल फोन और पासपोर्ट
- जाली नोट बनाने वाले रसायन और उपकरण
- एक मोटरसाइकिल
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर क्या असर पड़ेगा
जांच अधिकारियों का कहना है कि सुशील तिवारी की गिरफ्तारी से इस अंतरराष्ट्रीय जाली नोट गिरोह की कमर टूट गई है। वह पूछताछ में कई अहम खुलासे कर रहा है, जिससे सीमा पार संचालित जाली करेंसी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होने की उम्मीद है। पुलिस अब उन अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है जो इस अवैध कारोबार में उसकी मदद कर रहे थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सुशील तिवारी उर्फ दया तिवारी कौन है?
सुशील तिवारी अंतरराष्ट्रीय जाली नोट गिरोह का मुख्य सरगना है, जिसका नेटवर्क भारत, नेपाल और बांग्लादेश तक फैला था। वह 31 जनवरी 2026 को हुए खुलासे के बाद से फरार था।
इस गिरोह को पकड़ने में किन एजेंसियों ने मदद की?
इस कार्रवाई में लखनऊ की आर्मी इंटेलिजेंस, बिहार विशेष कार्य बल (STF) और मोतिहारी के हरैया थाना पुलिस की संयुक्त टीम शामिल थी।