Bihar के मिथिला मखाना की ऑस्ट्रेलिया में धूम, किसानों को मिला बाजार भाव से 18% ज्यादा मुनाफा

Bihar: बिहार के मिथिला मखाने ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना ली है। पहली बार बिहार से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया भेजा गया है। सबसे खास बात यह है कि इस खेप के लिए मखाना सीधे दरभं

Bihar: बिहार के मिथिला मखाने ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना ली है। पहली बार बिहार से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया भेजा गया है। सबसे खास बात यह है कि इस खेप के लिए मखाना सीधे दरभंगा के किसानों से खरीदा गया, जिससे उन्हें बाजार की तुलना में 18% अधिक लाभ मिला है।

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 7 अगस्त 2026 को पटना के बिहटा स्थित इंटीग्रेटेड यूनिट ऑफ इर्रेडिएशन कम पैकहाउस से इस खेप को हरी झंडी दिखाई। यह शिपमेंट शनिवार 8 अगस्त 2026 को रवाना हुआ। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर इसे वैश्विक बाजार में एक बड़ी उपलब्धि बताया और APEDA के सहयोग की तारीफ की।

मिथिला मखाना को अप्रैल 2022 में GI टैग मिला था, जिससे इसकी शुद्धता और गुणवत्ता की पहचान बढ़ी है। बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन में लगभग 90% का योगदान देता है। जुलाई 2025 से मखाना के लिए एक अलग HS कोड भी लागू हुआ है, जिससे निर्यात की प्रक्रिया आसान हुई है। इससे पहले जुलाई 2026 में बिहार से 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा भेजा गया था।

मुख्य विवरण जानकारी
कुल खेप 18 मीट्रिक टन
गंतव्य देश ऑस्ट्रेलिया
किसानों को लाभ 18% अधिक मुनाफा
रवानगी की तारीख 8 अगस्त 2026
मुख्य संस्थाएं APEDA, बिहार कृषि विभाग, NIAAD Green
लॉजिस्टिक्स पार्टनर जितबान सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड

कृषि विभाग के मुताबिक, इस खेप को सात कंटेनरों में पैक किया गया था। हवाई माल ढुलाई की जगह समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करने से परिवहन लागत कम होगी और भविष्य में बड़े पैमाने पर निर्यात संभव हो सकेगा। बिहटा स्थित पैकहाउस में विकिरण और गुणवत्ता परीक्षण जैसी आधुनिक सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया है, ताकि उत्पाद वैश्विक मानकों पर खरे उतरें।

मिथिला मखाना अपने पोषण मूल्य, कम वसा और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण दुनिया भर में सुपरफूड के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। इस पहल से न केवल दरभंगा के किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि बिहार के अन्य कृषि उत्पादों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के रास्ते खुलेंगे।