Bihar में जमीन-मकान की रजिस्ट्री अब होगी पेपरलेस, WhatsApp पर मिलेगा डिजिटल डीड
Bihar: बिहार में जमीन, फ्लैट या किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए सरकार ने बड़ी सुविधा शुरू की है। अब लोगों को कागजों की मोटी फाइल लेकर निबंधन कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य के सभी 141 रजिस्ट्र
Bihar: बिहार में जमीन, फ्लैट या किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए सरकार ने बड़ी सुविधा शुरू की है। अब लोगों को कागजों की मोटी फाइल लेकर निबंधन कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य के सभी 141 रजिस्ट्री ऑफिस 17 अगस्त 2026 से पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएंगे, जिससे यह पूरी प्रक्रिया आसान और पारदर्शी हो जाएगी।
इस नए सिस्टम में डीड तैयार करने से लेकर स्टाम्प ड्यूटी के भुगतान, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और डिजिटल सिग्नेचर तक का सारा काम ऑनलाइन होगा। रजिस्ट्री पूरी होने के बाद खरीदार को उसका ऑफिशियल डिजिटल डीड WhatsApp या ईमेल के जरिए भेज दिया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस सेवा की शुरुआत वैशाली के हाजीपुर से की थी।
बुजुर्गों के लिए सरकार ने विशेष सुविधा दी है। 75 साल या उससे अधिक उम्र के नागरिकों के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और रजिस्ट्री की डोरस्टेप सर्विस मिलेगी, यानी अधिकारी उनके घर जाकर यह काम पूरा करेंगे। साथ ही, जमीन की सही मैपिंग के लिए GIS टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि एक ही प्लॉट को दो बार बेचने जैसे फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
राजस्व चोरी रोकने के लिए ‘इंडियन स्टाम्प अमेंडमेंट बिल-2026’ लागू किया गया है। अगर कोई संपत्ति की कीमत जानबूझकर कम दिखाता है, तो अब उसे चोरी हुए राजस्व का 100% तक जुर्माना देना पड़ सकता है, जो पहले सिर्फ 10% था। इसके अलावा, राजस्व चोरी के मामलों की जांच की अवधि भी 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दी गई है।
| सेवा/सुविधा | नियम और विवरण |
|---|---|
| पेपरलेस लागू होने की तारीख | 17 अगस्त 2026 (सभी 141 ऑफिस) |
| बुजुर्गों के लिए सुविधा | 75 वर्ष से अधिक उम्र वालों को घर पर रजिस्ट्री सुविधा |
| डॉक्यूमेंट डिलीवरी | WhatsApp और Email के माध्यम से |
| राजस्व चोरी पर जुर्माना | चोरी की गई राशि का 100% तक जुर्माना |
| जांच की अवधि | 2 साल से बढ़ाकर 4 साल की गई |
| सर्विस प्रोवाइडर फीस (1 लाख तक) | 1,000 रुपये |
| सर्विस प्रोवाइडर फीस (1-5 लाख) | 2,500 रुपये |
| सर्विस प्रोवाइडर फीस (5 लाख से ऊपर) | अधिकतम 5,000 रुपये |
जो लोग तकनीक के इस्तेमाल में सहज नहीं हैं, उनके लिए अधिकृत सर्विस प्रोवाइडर की मदद ली जा सकती है। बिचौलियों की मनमानी रोकने के लिए सरकार ने इनकी फीस तय कर दी है। इसके अलावा, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए एक पब्लिक ग्रीवेंस मॉड्यूल भी बनाया गया है। हालांकि, कुछ लोगों ने सर्वर और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती को लेकर चिंता जताई है ताकि डिजिटल लोड के समय सिस्टम धीमा न पड़े।