Bihar के लखीसराय में NEET री-एग्जाम में बड़ा फर्जीवाड़ा, मेडिकल छात्रों समेत 30 गिरफ्तार

लखीसराय: बिहार के लखीसराय में NEET-UG की पुनर्परीक्षा के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने मेडिकल छात्रों और बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारियों समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में

लखीसराय: बिहार के लखीसराय में NEET-UG की पुनर्परीक्षा के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने मेडिकल छात्रों और बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारियों समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि परीक्षा में असली उम्मीदवारों की जगह ‘डमी’ छात्र बैठाए गए थे, जिन्हें इस काम के लिए मोटी रकम दी गई थी।

यह पूरी घटना 21 जून 2026 को आयोजित पुनर्परीक्षा के दौरान हुई। लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार ने अन्य अधिकारियों के साथ केंद्रों का दौरा किया, जिसके बाद इस धोखाधड़ी की बात सामने आई। पुलिस ने किऊल और कवैया थाना में भारतीय न्याय संहिता और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

इस गिरोह का मास्टरमाइंड पावापुरी मेडिकल कॉलेज के 2022 बैच का छात्र रवि उर्फ रविशंकर उर्फ सम्राट बताया जा रहा है। जांच के दौरान पता चला कि सॉल्वर गैंग उम्मीदवारों से परीक्षा पास कराने के लिए 10 लाख से 12 लाख रुपये तक की मांग कर रहा था, जिसमें 1 से 2 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे।

विवरण जानकारी
कुल गिरफ्तार लोग 30 (9 डमी छात्र, 18 बायोमेट्रिक कर्मचारी, 3 अन्य)
मुख्य आरोपी रवि उर्फ सम्राट (पावापुरी मेडिकल कॉलेज)
जब्त सामान 34 मोबाइल, नकली आधार कार्ड, एडिटेड एडमिट कार्ड, बायोमेट्रिक टैब
शामिल कॉलेज AIIMS रायबरेली, BHU, PMCH, नालंदा मेडिकल कॉलेज और अन्य
परीक्षा केंद्र हसनपुर उच्च विद्यालय, केआरके उच्च विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय
प्रभावित छात्र संजीत कुमार (नालंदा जिला)

जांच में यह भी सामने आया कि बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारियों ने मिलीभगत कर प्रतिरूपकों को वेरिफिकेशन पास कराने में मदद की। इसके लिए जाली दस्तावेजों और नकली आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया था। पावापुरी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सर्विल कुमारी ने कहा है कि अनुपस्थित रहने वाले छात्रों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी और उनके माता-पिता को सूचित किया जाएगा।

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने कहा है कि पुनर्परीक्षा कड़ी सुरक्षा में हुई थी और किसी सिस्टम फेलियर का सबूत नहीं मिला है। हालांकि, कदाचार करने वाले सभी लोगों को कानून के दायरे में लाकर कार्रवाई की गई है। पुलिस अब इस अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग के अन्य संपर्कों की तलाश कर रही है।