Bihar के कटिहार में बाढ़ की मजबूरी, सावन में बहुओं को छोड़ना पड़ता है मायके

कटिहार: बिहार के कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड में एक ऐसी स्थिति है जहां सावन और भादो के महीने नई दुल्हनों और गर्भवती महिलाओं के लिए मुश्किल लेकर आते हैं। यहां के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही बह

कटिहार: बिहार के कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड में एक ऐसी स्थिति है जहां सावन और भादो के महीने नई दुल्हनों और गर्भवती महिलाओं के लिए मुश्किल लेकर आते हैं। यहां के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही बहुओं को उनके मायके या रिश्तेदारों के घर भेज दिया जाता है। यह कोई सामाजिक रस्म नहीं बल्कि बाढ़ की त्रासदी से उपजी एक मजबूरी है।

प्राणपुर प्रखंड के धबोल, शाहनगर, इमाम नगर और शिव मंदिर टोला जैसे गांवों में मानसून की पहली बारिश के साथ ही यह सिलसिला शुरू हो जाता है। महानंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से इन इलाकों का संपर्क मुख्य सड़क मार्ग से टूट जाता है। ऐसे में अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंचना नामुमकिन हो जाता है, जिसके कारण महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाता है। ये महिलाएं आमतौर पर दशहरा के बाद ही अपने ससुराल लौट पाती हैं जब पानी कम होता है और हालात सामान्य होते हैं।

पुरानी मकरचला, जल्ला, हरेरामपुर और लालगंज जैसे गांव तो पूरी तरह विस्थापित हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे बचपन से यह सब देख रहे हैं और अब वे प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। बरारी के विधायक विजय सिंह ने विधानसभा में इस कटाव का मुद्दा उठाया और बताया कि सरकार विश्व बैंक से ऋण लेकर इसका हल निकालने की कोशिश कर रही है। जिला परिषद सदस्य सुमति देवी ने भी प्रशासन से वैज्ञानिक तरीके से कटाव-रोधी योजना बनाने की मांग की है।

प्रशासनिक मोर्चे पर, जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने 11 जुलाई 2026 को बताया कि बाढ़ की तैयारी पूरी कर ली गई है और निगरानी की जा रही है। इससे पहले पूर्व DM उदय मिश्रा ने भी बांधों के निरीक्षण और आश्रय स्थल बनाने के निर्देश दिए थे। ग्रामीण अब तटबंध और बेहतर आवागमन की व्यवस्था चाहते हैं ताकि उन्हें हर साल अपने परिवार से अलग न होना पड़े।