Bihar में सावन से पहले गूंज उठा कच्ची कांवड़िया पथ, AI कैमरों से होगी निगरानी और लागू होंगे नए नियम

Bhagalpur: पवित्र सावन महीने की शुरुआत में अभी कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले कच्ची कांवड़िया पथ पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जैसे इलाको

Bhagalpur: पवित्र सावन महीने की शुरुआत में अभी कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले कच्ची कांवड़िया पथ पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जैसे इलाकों से कांवड़िए पहुँच रहे हैं, जिससे पूरा रास्ता ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा है।

सावन की आधिकारिक शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी और 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक के साथ यह यात्रा संपन्न होगी। प्रशासन ने इस बार सुरक्षा और सुविधा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। कांवड़ के आकार को लेकर सख्त मानक तय किए गए हैं, जिसमें अधिकतम ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट रखी गई है। जिला सीमाओं पर हाइट गेज लगाए जाएंगे ताकि बिजली के तारों और पुलों से कोई हादसा न हो और ट्रैफिक भी बाधित न रहे।

भागलपुर जिला प्रशासन ने श्रावणी मेला 2026 के लिए विशेष तैयारी की है। इस बार कांवड़ियों के लिए ‘दीदी की रसोई’ चलाई जाएगी। नमामि गंगे घाट और कृष्णगढ़ चौक पर विशेष लाइटिंग की जाएगी। साथ ही, श्रद्धालुओं की मदद के लिए स्थानीय भाषा में जिंगल और एक श्रावणी मेला ऐप भी तैयार किया जा रहा है। बिहार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र जल्द ही सुल्तानगंज का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।

मुंगेर जिले में 26 किलोमीटर के कांवड़ पथ को हाईटेक बनाया जा रहा है। यहाँ पहली बार AI कैमरों के जरिए निगरानी होगी और पाँच टेंट सिटी बनाई जाएंगी। बारिश को देखते हुए कच्चे रास्तों की मरम्मत और जल निकासी के काम किए जा रहे हैं। हालांकि, 16 जुलाई तक की रिपोर्ट के अनुसार कुछ जगहों पर अभी भी गड्ढे और कीचड़ देखा गया है, जिन्हें ठीक करने का काम जारी है।

श्रद्धालुओं के लिए कुछ जरूरी नियम भी बताए गए हैं। गंगाजल से भरी कांवड़ को जमीन पर रखने के बजाय ऊंचे स्टैंड का इस्तेमाल करना होगा। यात्रा के दौरान शुद्ध शाकाहारी भोजन, ब्रह्मचर्य का पालन और स्वच्छता का ध्यान रखने की सलाह दी गई है। निजी स्तर पर भी होटल, भोजनालय और मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाएं युद्धस्तर पर तैयार की जा रही हैं।