Bihar और Jharkhand के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। साहिबगंज से भागलपुर होते हुए पटना तक गंगा जलमार्ग के जरिए कोयला और गिट्टी की ढुलाई का काम शुरू हो गया है। इस नई सेवा से न केवल व्यापार को रफ्तार मिलेगी, बल्कि
Bihar और Jharkhand के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। साहिबगंज से भागलपुर होते हुए पटना तक गंगा जलमार्ग के जरिए कोयला और गिट्टी की ढुलाई का काम शुरू हो गया है। इस नई सेवा से न केवल व्यापार को रफ्तार मिलेगी, बल्कि भारी सामान ढोने का खर्च भी पहले से काफी कम हो जाएगा। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने इस प्रोजेक्ट के जरिए सड़क मार्ग पर गाड़ियों के भारी दबाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
व्यापारियों और उद्योगों को इस सेवा से क्या बड़े फायदे होंगे?
सड़क के रास्ते भारी मात्रा में कोयला या पत्थर ढोना काफी महंगा और समय लेने वाला काम होता है। जलमार्ग से ढुलाई शुरू होने से लागत में बड़ी कमी आएगी। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार के मुताबिक, जल परिवहन रेल और सड़क के मुकाबले कहीं ज्यादा सस्ता और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है। इससे ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण भी कम होगा। कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- साहिबगंज से पटना तक 600 और 1150 टन क्षमता वाले कार्गो जहाजों का इस्तेमाल हो रहा है।
- NTPC बाढ़ और बरौनी थर्मल पावर को कोयले की सप्लाई अब आसानी से हो पाएगी।
- सड़क मार्ग पर लगने वाले लंबे जाम से आम जनता को राहत मिलेगी।
- मार्च 2026 के अंत से ही गिट्टी लेकर जहाजों का आना-जाना शुरू हो चुका है।
आने वाले समय के लिए क्या है सरकार की नई तैयारी?
सरकार की योजना इस जलमार्ग सेवा को केवल साहिबगंज और पटना तक ही सीमित रखने की नहीं है, बल्कि इसे जल्द ही वाराणसी तक बढ़ाने की तैयारी है। व्यापारिक गतिविधियों को आसान बनाने के लिए गंगा के किनारे कई शहरों में नए टर्मिनल और जेटी बनाए जाएंगे। इसके लिए भागलपुर में भी सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। भविष्य के बदलावों पर एक नज़र यहाँ डालें:
| सुविधा का प्रकार |
स्थान/शहर |
| स्थायी टर्मिनल |
पटना और कालूघाट |
| फ्लोटिंग जेटी (स्टील पंटून) |
भागलपुर, मनिहारी (कटिहार) और बक्सर |
| प्रस्तावित जलमार्ग विकास |
गंगा, गंडक, कोसी और सोन नदी |
| नए जेटी निर्माण स्थल |
कहलगांव, सुलतानगंज, मुंगेर और बेगूसराय |
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘राष्ट्रीय जलमार्ग विनियम, 2025’ भी पेश किए हैं। इससे उद्योगों को अपना सामान एक जगह से दूसरी जगह भेजने में आसानी होगी और बिहार के प्रमुख शहरों के बीच एक मजबूत जल परिवहन नेटवर्क तैयार हो जाएगा।