Bihar: बिहार सरकार जेलों में बंद कैदियों को रोजगार देने के लिए एक अलग तरह की योजना ला रही है। इसके तहत जेल परिसर की खाली जमीन पर पेट्रोल और डीजल पंप खोले जाएंगे। इन पंपों को चलाने की जिम्मेदारी चुनिंदा कैदियों को सौंपी ज
Bihar: बिहार सरकार जेलों में बंद कैदियों को रोजगार देने के लिए एक अलग तरह की योजना ला रही है। इसके तहत जेल परिसर की खाली जमीन पर पेट्रोल और डीजल पंप खोले जाएंगे। इन पंपों को चलाने की जिम्मेदारी चुनिंदा कैदियों को सौंपी जाएगी। अगर यह योजना शुरू होती है, तो बिहार ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।
इस योजना की प्रक्रिया और मंजूरी का क्या स्टेटस है?
बिहार के गृह (कारा) विभाग ने इस पूरी योजना का एक प्रस्ताव तैयार कर लिया है। फिलहाल इसे राज्य के वित्त विभाग के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। वित्त विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद इसे विधि विभाग के पास भेजा जाएगा और अंत में राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद यह लागू होगा। कारा विभाग ने इस काम के लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ समझौता करने का फैसला किया है।
किन कैदियों को मिलेगा काम और कितनी होगी कमाई?
इस काम में सभी कैदियों को शामिल नहीं किया जाएगा। केवल उन दोषियों को चुना जाएगा जो लंबे समय से सजा काट रहे हैं और सुधार की प्रक्रिया में हैं। विचाराधीन कैदी और गंभीर अपराधों में शामिल दोषियों को इस काम से दूर रखा जाएगा। काम करने वाले कैदियों को जेल मैनुअल के हिसाब से मजदूरी मिलेगी। अभी बिहार की जेलों में कौशल के आधार पर कैदियों को रोजाना 147 रुपये से 397 रुपये तक मिलते हैं। इस पंप से होने वाली कमाई का इस्तेमाल कैदियों के कल्याण के लिए किया जाएगा।
कहाँ खुलेगा पहला पंप और क्या है जेलों की स्थिति?
योजना के मुताबिक पहला पेट्रोल पंप पूर्णिया सेंट्रल जेल में खोलने की तैयारी है। पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर नजर रखने के लिए एक अलग सिस्टम बनाया जाएगा। वर्तमान में बिहार की 59 जेलों की क्षमता 47,750 कैदियों की है, लेकिन वहां 61,891 कैदी बंद हैं। यानी जेलों में क्षमता से करीब 30 प्रतिशत ज्यादा कैदी हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार की किस जेल में सबसे पहले पेट्रोल पंप खुलेगा?
प्रस्ताव के अनुसार, इस योजना के तहत पहला पेट्रोल पंप पूर्णिया सेंट्रल जेल में खोलने की योजना बनाई गई है।
क्या सभी कैदी पेट्रोल पंप पर काम कर पाएंगे?
नहीं, केवल लंबे समय की सजा काट रहे और सुधार प्रक्रिया में शामिल चुनिंदा कैदी ही काम करेंगे। गंभीर अपराधों के दोषियों और विचाराधीन कैदियों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।