Bihar: भारत और नेपाल की सीमा पर प्रशासन के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। यहाँ चोर गिरोह अब बड़े कांड करने के लिए छोटे बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं। रेलवे की संपत्ति चोरी करने के लिए मासूम बच्चों को मोहरा बनाया जा रहा
Bihar: भारत और नेपाल की सीमा पर प्रशासन के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। यहाँ चोर गिरोह अब बड़े कांड करने के लिए छोटे बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं। रेलवे की संपत्ति चोरी करने के लिए मासूम बच्चों को मोहरा बनाया जा रहा है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की टेंशन बढ़ गई है।
कैसे हो रही है चोरी और कौन हैं इसमें शामिल
हाल ही में RPF ने रामगढ़वा रेलवे स्टेशन के पास से एक रेलवे कर्मचारी राकेश कुमार उर्फ ऋषुकुमार और उसके एक साथी को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 32 मीटर तांबे का तार बरामद हुआ है। यह गिरोह बच्चों से चोरी करवाता है और फिर साइकिल, हाथगाड़ी या सिर पर लादकर सामान को ग्रामीण रास्तों से नेपाल भेज देता है, जहाँ कबाड़ियों को यह सामान बेच दिया जाता है।
पिछले कुछ समय में हुई गिरफ्तारियां और कार्रवाई
- पिछले तीन सालों में पश्चिम चंपारण के सीमावर्ती इलाकों में रेलवे चोरी के मामले में करीब एक दर्जन लोग पकड़े गए हैं।
- पकड़े गए लोगों में चार नेपाली नागरिक भी शामिल हैं।
- रक्सौल, नरकटियागंज और सीतामढ़ी रेल सेक्शन में इस तरह की चोरियां ज्यादा देखी गई हैं।
सीमा पर बढ़ता मानव तस्करी का खतरा
सिर्फ चोरी ही नहीं, बल्कि सीमा पर बच्चों की तस्करी भी बढ़ी है। 5 मई 2026 को सुपौल के भीमनगर चेक पोस्ट पर SSB ने 8 बच्चों को बचाया और दो तस्करों को गिरफ्तार किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी 10 अप्रैल 2026 को इस पर चिंता जताई है और कहा है कि लापता बच्चों के मामलों को तब तक तस्करी माना जाए जब तक कि सच सामने न आए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रेलवे चोरी के लिए बच्चों का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है
चोर गिरोह बच्चों से रेलवे ट्रैक, क्लिप और तांबे के तार चोरी करवाते हैं। फिर इन सामानों को साइकिल और हाथगाड़ियों के जरिए ग्रामीण रास्तों से नेपाल ले जाकर कबाड़ियों को बेच दिया जाता है।
सीमा पर बच्चों को बचाने के लिए कौन सी एजेंसियां काम कर रही हैं
भारत-नेपाल सीमा पर RPF, SSB, स्थानीय पुलिस और ‘देहात इंडिया’ जैसे NGO मिलकर काम कर रहे हैं। लक्ष्मी खत्री जैसी सामाजिक कार्यकर्ता भी पिछले तीन दशकों से बच्चों को बचाने में जुटी हैं।