Bihar में बदलने जा रही उच्च शिक्षा की तस्वीर, अब UG कॉलेज नहीं रहेंगे राज्यपाल के अधीन
Bihar: राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली में एक बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब स्नातक (UG) कॉलेज राज्यपाल के नियंत्रण से बाहर होकर सीधे सरकार के अधीन आ जाएंगे। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने 12 जुलाई को एक कार्यक्रम में बताया
Bihar: राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली में एक बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब स्नातक (UG) कॉलेज राज्यपाल के नियंत्रण से बाहर होकर सीधे सरकार के अधीन आ जाएंगे। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने 12 जुलाई को एक कार्यक्रम में बताया कि आने वाले विधानसभा सत्र में इसके लिए एक नया शिक्षा विधेयक पेश किया जाएगा।
बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र 20 जुलाई से 25 जुलाई 2026 तक चलेगा, जिसमें यह मसौदा कानून लाया जाएगा। इस नए कानून के तहत डिग्री कॉलेजों को राज्य विश्वविद्यालयों से अलग कर दिया जाएगा। इससे स्नातक डिग्री देने वाले 500 से ज्यादा कॉलेज सीधे नवगठित उच्च शिक्षा विभाग के कंट्रोल में होंगे। अब राज्यपाल का अधिकार केवल स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों तक ही सीमित रहेगा।
इस नई व्यवस्था से कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों की पदोन्नति, प्रशासनिक फैसले और नीति-निर्माण जैसे काम अब सीधे उच्च शिक्षा विभाग संभालेगा। साथ ही, शिक्षकों के लिए यह नियम होगा कि वे किसी भी राजनीतिक गतिविधि या विचारधारा का प्रचार नहीं करेंगे। निगरानी के लिए हर जिले में एक उच्च शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जैसा कि स्कूलों में जिला शिक्षा अधिकारी होते हैं।
| प्रमुख बदलाव और अपडेट | विवरण |
|---|---|
| नया कानून | पटना विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 और बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 का विलय होगा |
| प्रशासनिक नियंत्रण | UG कॉलेज अब सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन होंगे |
| नए कॉलेज | CM सम्राट चौधरी ने भागलपुर में 211 नए सरकारी डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन किया |
| भर्ती प्रक्रिया | नए कॉलेजों में सहायक प्रोफेसरों की भर्ती संविदा के आधार पर होगी |
| डिग्री लक्ष्य | लंबित डिग्रियों को 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है |
| ट्रांसफर नियम | नई शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2026 लागू, प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी |
| PG और PhD नियम | NEP 2020 के अनुरूप नए पीजी और पीएचडी नियमों को मंजूरी मिली है |
हाल ही में 26 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल के बीच एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें अन्य राज्यों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की अच्छी प्रणालियों को अपनाने पर चर्चा हुई थी। इस बदलाव का मकसद उच्च शिक्षा को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।